Shobhit Dixit

Top 10 of Shobhit Dixit

    दिन-ब-दिन तुम ख़ूब-सूरत हो रही हो
    दिन-ब-दिन हम और पागल हो रहे हैं
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    पत्थर दिल के आँसू ऐसे बहते हैं
    जैसे इक पर्वत से नदी निकलती है
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    देखा जिस मेहताब ने तुम को
    उस को उस की ईद मुबारक
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    आँखों पर चश्मा होंठों पर तिल भी है
    वहीं कहीं देखो तो मेरा दिल भी है

    हम को एक पेपर में अव्वल आना है
    जो दूसरे दर्जे का है और मुश्किल भी है
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    अब तो मेरे सारे सावन बीत गए
    बिन मौसम अब बादल बरसे उस सेे क्या
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    छत पे जाने को बोल रहे हैं
    फिर तह ख़ानों को खोल रहे हैं

    दस्तक देने में डर लगता है
    सो खुल जा सिम सिम बोल रहे हैं
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    हम ने इक वहम पाल रखा है
    उस का ही तो मलाल रखा है

    टूटा था दिल तो एक दफ़ा बस
    वो दर्द अब तक सम्हाल रखा है
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    मेरे दुख को मुझ सेे ज़्यादा कौन समझा
    मेरा दुख भी बिल्कुल मुझ-सा हो रहा था
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    तजरबा जितना बढ़ने लगता है
    आईना शक्लें पढ़ने लगता है
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    पतंग को उस वक़्त खींचा गया
    हवा जब कह रही थी ढील दो
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