सीने में मेरे दिल ये धड़कता है के तुम हो
साँसों पे किसी और का कब्ज़ा है के तुम हो
तन्हा मैं चला जाता हूँ हर राह पे फिर भी
हर मोड़ पे एहसास ये होता है के तुम हो
अंदाज़ ए सुख़न देख के कहते हैं ये अहबाब
शे'रों में मेरे मीर का लहजा है के तुम हो
ग़म इस का नहीं छोड़ दे तन्हा ये ज़माना
अब मुझ को फ़क़त तुम पे भरोसा है के तुम हो
जो आता है साए की तरह ख़्वाब में अक्सर
वो मेरा कोई चाहने वाला है के तुम हो
तलहा वो तुम्हें सामने लाएँ भी तो कैसे
सब सेे तो इसी बात का झगड़ा है के तुम हो
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