हर इक ख़ुशी के मौक़े' पर इक मज़हबी तकरार है
    कोई तो लाए अम्न का पैग़ाम ये दरकार है

    दहशत के बाज़ारों में मंदी कैसे आ सकती है अब
    दहशत जो फैलाते हैं अब उन की ही तो सरकार है

    जनता की जाएज़ माँगों पर बातें करें कैसे भला
    चारों तरफ़ बस बिक चुके अख़बारों की भरमार है

    अब ये अदाकारी तो लाज़िम होगी ही इन ख़बरों में
    ख़ुद उन का हाकिम भी तो अच्छा-ख़ासा इक फ़नकार है

    जिस ने सिखाई थीं वो सारी चालें उस को खेल की
    वो शख़्स ख़ुद इस खेल में अब हो गया लाचार है

    ये दोस्ती महँगी न पड़ जाए अमीर-ए-शहर को
    कब तक चलेगी एक दिन गिरनी ये भी सरकार है
    Read Full
    Yuvraj Singh Faujdar
    3 Likes
    उस की आँखों पर भले कह दी हों ग़ज़लें तुम ने लेकिन
    हुस्न पर मतला तो मेरा ही रहेगा भारी फिर भी
    Yuvraj Singh Faujdar
    3 Likes
    तुम मोहब्बत हो मेरी ये भी अगर समझा न पाया
    फिर तो लानत है बहुत लानत है मेरी शा'इरी पर
    Yuvraj Singh Faujdar
    3 Likes
    लड़कों को इश्क़ में दिलचस्पी है
    लड़कों को आता नहीं ख़ुश रहना
    Yuvraj Singh Faujdar
    3 Likes
    ख़्वाब जो इक देखा है हम ने वो पूरा होना भी है
    अब उसी को सोच कर के जागना भी सोना भी है

    उस को तुम ने पा लिया है पर ये भी तुम याद रखना
    जो भी चीज़ें हैं मुयस्सर उन को इक दिन खोना भी है

    भाई बहनों में ये खट्टे मीठे झगड़े होने देना
    कल विदाई में लिपट कर के उन्हें फिर रोना भी है

    ला चुका हूँ मैं कई मोती समुंदर में उतर कर
    अब समुंदर में किसी दिन डूबकर के खोना भी है

    तुझ को पाने की ख़ुशी में पूरा घर मुस्काया मेरा
    तुझ को खोने से दुखी कोई सिसकता कोना भी है
    Read Full
    Yuvraj Singh Faujdar
    4 Likes
    बेक़रारी है बहुत दिल में तुम्हारे जाने से
    फूल खिल जाते थे बे-मौसम तुम्हारे आने से

    है मोहब्बत तुम को तो फिर कर के दिखलाओ मुझे
    काम चलने वाला थोडी है यहाँ शर्माने से

    तुम सेे तो अब छत पे भी आना नहीं हो पा रहा
    तुम ने क्या ब्रेकअप का सोचा है फिर इस दीवाने से

    जान लो इक बात ये भी मुझ सेे मेरे बारे में
    मैं पलटता हूँ नहीं फिर रोने से पछताने से
    Read Full
    Yuvraj Singh Faujdar
    3 Likes
    जिस्मों की भूख हम को नहीं है
    पेड़ देखे हैं फल खाते तुम ने
    Yuvraj Singh Faujdar
    3 Likes
    मिलने से रोका था इक तितली को हम ने फूल से
    अपनी जाँ से मिल न पाए हम क़यामत आने तक
    Yuvraj Singh Faujdar
    3 Likes
    मेरे दिल में सिर्फ़ सीधे लोगों की है अब जगह
    चैस में भी घोड़े की चालें नहीं चलता मैं अब
    Yuvraj Singh Faujdar
    3 Likes
    आँखों से भी मुस्कुराना जानती हो
    होंठों से भी काम वो ही करना है अब
    Yuvraj Singh Faujdar
    3 Likes

Top 10 of Similar Writers