YAWAR ALI

Top 10 of YAWAR ALI

    अँधेरों का न रह जाए कहीं नाम-ओ-निशाँ बाक़ी
    चलो आओ कि हम मिल कर मनाएँ ऐसे दीवाली
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    झेलने होंगे तुम को ये मौसम सभी
    ज़िंदगी बस नहीं फ़रवरी की तरह
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    आप के बा'द कोई आप के जैसा न मिला
    ख़ूब ढूँढी है दवा हम ने दवा-ख़ानों में
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    गर हाथ कोई थामने वाला हो सफ़र में
    तपता हुआ सहरा भी बयाबाँ नहीं लगता
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    ख़ूब मालूम था अंजाम-ए-मुहब्बत फिर भी
    लोग इस आग के दरिया में उतर कर डूबे
    YAWAR ALI
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    मुसीबत में भी मेरी ये समझदारी नहीं जाती
    ख़फ़ा कितना भी होऊँ नर्म-गुफ़्तारी नहीं जाती

    कोई अपना ग़लत हो गर तो लहजा नर्म रहता है
    ग़लत तो है मगर मुझ से ये बीमारी नहीं जाती

    बड़ी मग़रूर आदत है ग़मों में मुस्कुराने की
    मेरी नस नस में बहती ये अदाकारी नहीं जाती

    कोई उम्मीद जब बचती नहीं झुकना ही पड़ता है
    किसी से यूँँ ही कोई सल्तनत हारी नहीं जाती

    जहाँ भी फ़ायदा देखें झुका देते हैं सर अपने
    ये आदत आज भी लोगों की दरबारी नहीं जाती

    हसद की आग में सब जल रहे हैं एक दूजे से
    न जाने क्यूँँ दिलों से ये महामारी नहीं जाती

    लुटा हूँ बारहा मैं इश्क़ के जिन रहगुज़ारों पर
    उन्हीं राहों से मेरी आज भी यारी नहीं जाती
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    क़लम हाथों में लकड़ी का कलर तन पे सियाही के
    न जाने खो गए जा कर कहाँ दिन बादशाही के
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    इल्म ये हासिल नहीं होगा किताबों से तुम्हें
    दोस्तो सीखोगे चलना ठोकरें खाने के बा'द
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    बड़ी मुश्किल से होती है मुकम्मल इक ग़ज़ल "यावर"
    मियाँ, है राह इतनी भी नहीं आसान ग़ज़लों की
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    मैं अपने मन के मंदिर में कोई मूरत तो रख लेता
    तेरा पर्यायवाची पर कहाँ से ढूँढ़ कर लाऊँ
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