Zain Aalamgir

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    'कुन' तलक आ यहाँ रुकेगा सब
    ना तिरा कुछ रहे, न मेरा कुछ
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    ऐ दोस्त! इतना प्यार मुझ सेे मत करो
    हम रफ़्तगाँ हैं, दोस्त किस के तो बनो
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    ख़ुद फ़लक से हो उतारा नैन तेरे
    जो ख़ुदा ने हो सँवारा नैन तेरे

    वादियाँ कितनी हसीं के जन्नती दिख
    हम-नशीं ऐसा नज़ारा नैन तेरे

    ख़्वाइशें होती मुकम्मल, तो समझ लो
    आसमाँ का गिर सितारा, नैन तेरे

    मुफ़्लिसी छाई, पता दो तुम ख़ुदा का
    जो नहीं मिल, फिर सहारा नैन तेरे

    प्यास है कब से लगी मुझ को, मिटा दे
    इक समुंदर का किनारा, नैन तेरे

    चैन मिलता है कहाँ, कोई बताए
    पास है जिस ने पुकारा, नैन तेरे

    के ख़बर हम को हमारी भी नहीं है
    हाल पूछे जो हमारा, नैन तेरे

    मय-कशी से अब मिरी हालत बुरी है
    दे बुलाने का इशारा नैन तेरे

    लुट चुके है हम, बचा कुछ भी नहीं है
    कर दिया किस ने ख़सारा? नैन तेरे

    राइगाँ सब कुछ यहाँ, हर चीज़ छोड़ा
    बस नहीं था जो नकारा, नैन तेरे

    ज़िंदगी का राज़ बस इतना कहेंगे
    यार जीने का गुज़ारा नैन तेरे
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    सब याद रहता है मुझे
    ये ज़ुल्म भी तारी यहाँ
    Zain Aalamgir
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    रख हाथ सीने पर किया तस्दीक़, फिर आया समझ
    ये दिल धड़कता अब तलक, मर ना गया दीदार कर
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    सच बात है, इज़हार हम ने इश्क़ का उन सेे किया
    दीवार से उम्मीद है, वो बात हम सेे कर सके
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    सादगी मुझ
    में नहीं, इंसान मैं भी हूँ हरामी
    हाथ हो तेरा मिलाना झूठ, फ़र्ज़ी हो मिरा भी
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    Zain Aalamgir
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    दुआ करूँ कौन सी, ख़ुदा हो सके मिरे पास, कह दो ना
    गुनाह वो कौन सा न कर दूँ, नसीब जन्नत मुझे होगी
    Zain Aalamgir
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    काग़ज़ी ये कश्तियाँ डूबे न देखो
    बचपना इन पर सवारी कर दिखे है
    Zain Aalamgir
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    जा कर निहत्ता जंग में भी ये क़लम
    जीते रियासत कर सियाही को सुख़न
    Zain Aalamgir
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