Zain Aalamgir

Zain Aalamgir

@Zain_Aalamgir

Zain Aalamgir shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Zain Aalamgir's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
चुप रहेंगे या कहेंगे और तो ग़म क्या सहेंगे
रक्त अपनों के बहेंगे और मरहम क्या लगेंगे

जानते हैं वो सियासत के बड़े उम्दा खिलाड़ी
पर मुक़ाबिल पा हमें पूछेंगे "अब हम क्या करेंगे
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Zain Aalamgir
हम को हम सेा ऐब तुझ
में भी दिखा था
लब ना कहते, आँख में पर हाँ लिखा था
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Zain Aalamgir
पहली दफ़ा जब जाम होंटों से लगाया तो लगा
लब के तिरे होते हुए मय की तलब थी ही नहीं
Zain Aalamgir
ज़िन्दगी बर्बाद होती है ख़ुशी को ढूँढ़ते
गर निकलते ढूँढ़ने दुख को, मिली होती ख़ुशी
Zain Aalamgir
ये दिल फिर हम किस सेे लगाएँगे
जब दिल से किनारा कर आएँगे
Zain Aalamgir
दो-चार मिसरे जो लिखे, सब मिट गए
किरदार सारे ही कहानी के मरे
Zain Aalamgir
ये हक़ीक़त और ये उम्मीद, यकसाँ क्यूँ नहीं है
मुफ़लिसी जब हो मुक़द्दर, चल रही साँसे सज़ा हो
Zain Aalamgir
ये लोग जो मरते दिखे तुझ पर यहाँ
मरते नहीं क्यूँ ये तिरी ख़ातिर बता
Zain Aalamgir
ये शहर शोर-शराबा बहुत सुनाता है
मगर पुकारूँ किसे तो सुकूत काफ़ी है
Zain Aalamgir
अलविदा क्यूँ कर रहे चेहरे सभी इक दूसरे को
था कभी मक़सद बने सब आईना इक दूसरे का
Zain Aalamgir
बड़े ही अजब दौर का हूँ खिलाड़ी
जहाँ जीत पाई, वहीं मात भी थी
Zain Aalamgir
उम्मीद से हक़ीक़त कुछ कम बुरी लगेगी
गर आँख में रखोगे, हर दम नमी लगेगी
Zain Aalamgir
था सब मेरे उन झूठ में "तुम सेे मोहब्बत" आख़िरी
पर उस सेे मिलने पर मेरा पहला रहा सच भी यही
Zain Aalamgir
उठती मिरी तलवार दुश्मन की तरफ़ फिर रुक गई
दुश्मन कि माँ ने तब पुकारा जंग में बेटा मुझे
Zain Aalamgir
ख़्वाब ख़ातिर है मुयस्सर ना जगह भी, क्या करूँ मैं
आँख में हर वक़्त रहता है समुंदर आँसुओं का
Zain Aalamgir
'कुन' तलक आ यहाँ रुकेगा सब
ना तिरा कुछ रहे, न मेरा कुछ
Zain Aalamgir
फ़र्क़ 'मुझ
में' और 'तुझ
में' का यहाँ
बस 'हमारा' बन मिटेगा ये सनम
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Zain Aalamgir
यार बात करता मेरी, अजीब सा है वो
याद तो दिलाओ के जन्म-दिन उसी का है
Zain Aalamgir
मोहब्बत को किया हूँ क़ैद, चौकीदार मैं उस का
उलट था पर, मोहब्बत मुझ क़फस बाहर पे रख नज़रें
Zain Aalamgir
उजलत नहीं करना, किसी मंज़िल लिए
मंज़िल कहीं पाने बहुत हो देर ना
Zain Aalamgir

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