Aatish Alok

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    जो रुका हुआ था रुका रहा जो रुका नहीं उसे रोकना
    ये अजब रिवाज़ है इश्क़ का जो रुका नहीं उसे रोकना

    मैं कभी कभी हूँ ये सोचता कि हवा को हाथ से रोक लूँ
    मैं कभी कभी हूँ ये चाहता जो रुका नहीं उसे रोकना

    न मुझे सुकून न नींद ही न मिलेगा चैन ही एक दिन
    ये बहुत दिनों मुझे खाएगा जो रुका नहीं उसे रोकना
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    कभी मिलो तो बताएँ तुम्हें कि क्या है मुझे,
    जिसे समझते हो जन्नत वही सज़ा है मुझे

    मैं हर किसी को तेरे नाम से बुलाता हूँ,
    बिछड़ के तुझ सेे अजब रोग लग गया है मुझे
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    रौंद कर सपना किसी का मुस्कुराना ठीक नईं
    हाकिमों के हाँ में हाँ यूँँ भी मिलाना ठीक नईं

    अब निकलकर आ गए तो लौटना मुमकिन न है
    हारना तो ठीक है पर हार जाना ठीक नईं
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    बनाने को बना सकता हूँ तेरे दिल में घर ये जानता हूँ मैं
    मगर घर तोड़ने वालों के घर में घर बनाना है नहीं मुझ को
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    मैं तंग आ गया हूँ दोस्त ख़ुद ही अपने आप से
    जो तुम नहीं समझ सके तो क्या भला ग़ज़ब हुआ
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    भरोसा तोड़ कर अच्छा किया तुम ने
    मैं दुनिया पर भरोसा करने वाला था
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    इश्क़ में कितनी पागल है वो बुद्धू सी लड़की देखो तो
    जो गिला करो तो हँसती है ता'रीफ़ों पे रो देती है
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    बिछड़ कर क्या बताऊँ क्या रहा हूँ मैं
    रही आधे में तुम, आधा रहा हूँ मैं

    है तेरी मर्ज़ी मानों या न मानों तुम
    तेरी ख़ातिर ग़ज़ल कहता रहा हूँ मैं

    तेरा होकर, मैं तेरा हो नहीं पाया
    सो ख़ुद को तुम बनाने जा रहा हूँ मैं

    हुआ हूँ ख़ुश तेरे आमद से वरना तो
    ख़ुशी और रंज़ में यकसा रहा हूँ मैं

    इसी इक दिन के ख़ातिर ही तो मेरे दोस्त
    कई रातों को दिन करता रहा हूँ मैं
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    नफ़रतों की हार तय है ,प्रेम की बुनियाद है
    इस लिए तो देश ये था और ज़िंदाबाद है
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    मेरे दिल ने कहा तब हीं ये लड़का मैं नहीं हूँ
    महज़ उस सेे मिला था और फिर क्या? मैं नहीं हूँ

    उसी का प्यार हूँ मैं यार तेरा मैं नहीं हूँ
    समझ जैसा रहा है तू, न वैसा मैं नहीं हूँ

    कहा कैसे ये था तुम ने तिरा कोई नहीं है
    इधर देखो, कहो फिर से जरा, क्या मैं नहीं हूँ?

    तिरे ही नाम कर दी और तुम हो ज़िन्दगी जब
    क़सम अपनी किसी भी हाल खाता मैं नहीं हूँ

    गया थक दोहरी सी ज़िन्दगी जीकर यहाँ पर
    रहा हैं हँस ये मेरा मुखौटा ,मैं नहीं हूँ

    अभी तो ग़म है तेरे साथ सो कोई न होगा
    अभी तो सब कहेंगे मैं नहीं हूँ ,मैं नहीं हूँ

    मुझे मालूम है कल ये कहेंगे यार है आतिश
    यही वो लोग हैं कि आज जिन का मैं नहीं हूँ
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