Aatish Alok

Aatish Alok

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Aatish Alok shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Aatish Alok's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
माँग नहीं भर पाया उस की
दो आँखों को भर आया हूँ
Aatish Alok
इक शौक़ भी कमाल है इक ख़्वाब भी अज़ीज़
दोनों के ज़द में आदमी बे-मौत ही मरे
Aatish Alok
अपने साथ लिए जाता है आँखों को और कानों को
कुछ लोगों के जाने का सन्नाटा ऐसा होता है
Aatish Alok
छोड़ जाने का बहाना चाहिए था
तो मुझे पहले बताना चाहिए था

कैसे हँसते हो भला उस बात पर तुम
जिस
में तुम को डूब जाना चाहिए था
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Aatish Alok
अच्छा तो है बहुत पर मन से नहीं गया है
भीतर गया मगर वो उतने नहीं गया है

मैं ने मुनाफ़िक़ों को बाहर किया है ख़ुद ही
वो शख़्स ज़िंदगी से ऐसे नहीं गया है
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Aatish Alok
कहने को तो दुनिया तेरी बहुत बड़ी सी है मौला
मेरे ग़म के आगे लेकिन कितनी छोटी है मौला

तू भी तो हरदम केवल उस की ही सुनता रहता है
दुनिया भी तेरी बिल्कुल ही तेरे जैसी है मौला
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Aatish Alok
कभी मिलो तो बताएँ तुम्हें कि क्या है मुझे,
जिसे समझते हो जन्नत वही सज़ा है मुझे

मैं हर किसी को तेरे नाम से बुलाता हूँ,
बिछड़ के तुझ सेे अजब रोग लग गया है मुझे
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Aatish Alok
आज क़ब्रगाहों में हैं पड़े हुए जिन को
लगता था ख़ुदा इक दिन आएगा बचाएगा
Aatish Alok
एक दिन तुम देखना मैं जीभ काटूँगा इन्ही के
बीच में ही काट देते हैं तुम्हारी बात को जो
Aatish Alok
एक दिन भी जी न पाएगा यक़ीं सा था मुझे
वो मगर जीकर बताया झूठ लगता था मुझे

वो कि जिस ने कह दिया अब रोकने का मन नहीं
एक वो ही शख़्स था जो रोक सकता था मुझे
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Aatish Alok
तुझे ही क्यूँ नज़र आता नहीं मुझ आम सा लड़का
तेरे जब पास होता है तो कितना ख़ास होता है
Aatish Alok
अपनी अना को छोड़ तेरे दर में आ गया
तुम सोचने लगे कि बराबर में आ गया

पंछी तो जाल में है फँसा जानबूझकर
सय्याद सोचता है कि चक्कर में आ गया
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Aatish Alok
रौंद कर सपना किसी का मुस्कुराना ठीक नईं
हाकिमों के हाँ में हाँ यूँँ भी मिलाना ठीक नईं

अब निकलकर आ गए तो लौटना मुमकिन न है
हारना तो ठीक है पर हार जाना ठीक नईं
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Aatish Alok
अपने साथ लिए जाता है आँखों को और कानों को
कुछ लोगों के जाने का सन्नाटा ऐसा होता है
Aatish Alok
हिज्र मेरा देख लो और फिर कभी कहना नहीं
बेवफ़ाई कुछ नहीं है बे-वफ़ा कुछ भी नहीं
Aatish Alok
बनाने को बना सकता हूँ तेरे दिल में घर ये जानता हूँ मैं
मगर घर तोड़ने वालों के घर में घर बनाना है नहीं मुझ को
Aatish Alok
लुभाता है कहन मेरा तुम्हें तो इस लिए ऐ दोस्त
मेरे घर के बड़े लोगों से भी मिलता रहा हूँ मैं
Aatish Alok
रोज़ बस एक यही भूल किए जाता हूँ,
भूल जाता हूँ कि मैं भूल चुका हूँ तुम को
Aatish Alok
मैं तंग आ गया हूँ दोस्त ख़ुद ही अपने आप से
जो तुम नहीं समझ सके तो क्या भला ग़ज़ब हुआ
Aatish Alok
भरोसा तोड़ कर अच्छा किया तुम ने
मैं दुनिया पर भरोसा करने वाला था
Aatish Alok

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