हम ने अपने हक़ की मय क्या माँग ली
    मय-कदे हम से ख़फ़ा रहने लगे
    Ajeetendra Aazi Tamaam
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    कभी फूल देखती है कभी देखती है कलियाँ
    मुझे कर रही है पागल ये नज़र फिसल फिसल के
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    बाज़ बनना है तो फिर कद भूल जा
    आँख में रख लक्ष्य और हद भूल जा

    किसलिए डरता है दीवारों से तू

    समाँँ को देख सरहद भूल जा
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    मर न जाऊँ एक दिन ग़म से कहीं
    सर-ब-सर कर्ज़े में डूबा हूँ ख़ुदा
    Ajeetendra Aazi Tamaam
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    हर क़दम हर साँस गिरवी ज़िंदगी रहम-ओ-करम
    इतने एहसानों पे जीने से तो मर जाना सही
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    सताना रूठ जाना और मनाना इश्क़ है लेकिन
    अगर हद से ज़ियादा हो तो रिश्ते टूट जाते हैं
    Ajeetendra Aazi Tamaam
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    हमारे दिल ने पुकारा है अब चले आओ
    ज़बाँ पे नाम तुम्हारा है अब चले आओ

    फ़ज़ा में दर्द का मंज़र है रात काली है
    अजीब हाल हमारा है अब चले आओ

    हमारे पास भला और है ही क्या सोचो
    बस एक ही तो सहारा है अब चले आओ

    तुम्हारे बा'द तुम्हारी हसीन यादों में
    हर एक लम्हा गुज़ारा है अब चले आओ

    ख़राब हाल ये कश्ती है डूब जाएगी
    तुम्हारा साथ किनारा है अब चले आओ
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    Ajeetendra Aazi Tamaam
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    तन्हाई में अक्सर हद से गुजरती है
    जीने नहीं देती यादों की पुरवाई
    Ajeetendra Aazi Tamaam
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    इश्क़ वाली गमज़दा या दोस्ती वाली करें
    हम सुख़न-वर हैं बताओ शा'इरी कैसी करें

    बच गए तो ज़िंदगी लाचार कर देगी तुम्हें
    इस
    लिए मरने से पहले मौत को राजी करें

    मेरा दिल मेरी शिकायत मेरे दुख मेरी सज़ा
    आप को क्या ही पड़ी है आप बस जी जी करें

    बाद-ए-रुसवाई कोई ग़म ही नहीं रुसवाई का
    जी में आता है की अब रुस्वा हर इक हस्ती करें

    ऐ मोहब्बत तुझ सेे क्यूँ भरता नहीं आख़िर ये दिल
    कितना दिल को दर्द दें और कितना दिल ज़ख़्मी करें

    हिज्र की दीवार पर तस्वीर है इक हिज्र की
    सोचते हैं बारहा सीधी करें उल्टी करें

    वो जिंहोने ख़्वाहिशें पे ख़्वाहिशें तस्लीम की
    ज़िंदगी अच्छी कटेगी ख़्वाहिशें छोटी करें

    हम को अब हम सेे निकलने में लगेगा वक़्त कुछ
    छोड़ दें हम को हमारे हाल बस इतनी करें

    दिल दुखाकर बोलते हैं कितने दिल जूँ लोग हैं
    जाने वाले अब तुम्हारी फ़िक्र भी कितनी करें

    दर्द ही बस दर्द और इस के अलावा कुछ नहीं
    अब करें तो क्या करें क्या दर्द की खेती करें

    धीरे धीरे जल रहा है कुछ तमाम आज़ी कहीं
    इस सेे पहले ख़ाक हो जाएँ शिफ़ा जल्दी करें
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    Ajeetendra Aazi Tamaam
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    गुमान हम को नहीं अपनी शख़्सियत पे मगर
    जो हम सेे दुश्मनी करते तो सर गए होते
    Ajeetendra Aazi Tamaam
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