Ajeetendra Aazi Tamaam

Ajeetendra Aazi Tamaam

@aazitamaam

Aazi Tamaam shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Aazi Tamaam's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
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  • Nazm
बड़े जतन के बा'द बनी है मेरी सहेली तन्हाई
इक दूजे में ख़ुश रहते हैं मैं और मेरी तन्हाई
Ajeetendra Aazi Tamaam
हम ने अपने हक़ की मय क्या माँग ली
मय-कदे हम से ख़फ़ा रहने लगे
Ajeetendra Aazi Tamaam
ये मासूम चेहरा ये क़ातिल निगाहें
बहुत ख़ूब-सूरत हैं सारी अदाएँ
Ajeetendra Aazi Tamaam
ग़ुलामी से निकलना है अगर तो
चराग़-ए-ज़ेहन को रौशन करो तुम
Ajeetendra Aazi Tamaam
हर घड़ी इस ज़ेहन-ओ-दिल में गुफ़्तगू क्या है
कोई समझाए हमें ये जुस्तुजू क्या है
Ajeetendra Aazi Tamaam
वैसे ही तो ये साहिब-ए-मसनद
मुल्क के जाँ पनाह लगते हैं

जैसे कुछ बैठे लड़के बाइक पर
हू-ब-हू बादशाह लगते हैं
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Ajeetendra Aazi Tamaam
मिलते बिछड़ते रहते हैं हर मोड़ पर हमें
हम जैसे कोई रेल सवारी ये रास्ते

बाइक पे अपनी बैठ निकलते हैं घर से जब
रफ़्तार देखते हैं हमारी ये रास्ते
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Ajeetendra Aazi Tamaam
हज़ारों ख़्वाहिशें काग़ज़ पे ही दम तोड़ देती हैं
है स्याही सुर्ख़ फिर अपनी क़लम है ख़ूँ-चकाँ अपना
Ajeetendra Aazi Tamaam
फैली हुई हैं गाँव में ख़ुशियों की ख़ुश्बुएँ
चूल्हों पे आज फिर हैं पतीले चढ़े हुए
Ajeetendra Aazi Tamaam
जब लेता हूँ तेरी ख़ुशबू आती है
इन साँसों पे कैसे रोक लगाऊँ मैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
काट कर खाने का है अपना मज़ा
चूस कर खाने में बात इक और है

आम का राजा है अल्फांसो अगर
तो दशहरी की सिफ़ात इक और है
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Ajeetendra Aazi Tamaam
हर शय पे दस्तकारियाँ करते हो बे-मिसाल
बख़्शा है रब ने आप को दस्त-ए-हुनर कमाल
Ajeetendra Aazi Tamaam
पढ़ते हैं जो ये लोग अदाकारिओं के साथ
क्या हर्फ़-ए-इस्तिजाबी के जैसे रहे हैं हम
Ajeetendra Aazi Tamaam
भले हों ख़ून के रिश्ते या दुनिया के फ़रिश्ते हों
ग़म-ए-ग़ुर्बत के मारों को सहारा कौन देता है
Ajeetendra Aazi Tamaam
कंजूसी को ताक़ पे रखना होता है
गुड़ कहने से कब मुँह मीठा होता है
Ajeetendra Aazi Tamaam
रहती है कितनी शान से जर्जर मकान में
शर्म-ओ-हया को ओढ़ के लड़की ग़रीब की
Ajeetendra Aazi Tamaam
रहे सरहद का सैनिक जोश में ये सोच कर हर पल
खड़ा हूँ मैं सुरक्षित अब मेरा अपना वतन होगा

न बच पाए कोई दुश्मन भले ये जाँ चली जाए
मेरी क़िस्मत में भी इक दिन तिरंगे का कफ़न होगा
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Ajeetendra Aazi Tamaam
हुआ है वक़्त का हम पर करम ये
ज़रा सा ज़ख़्म दिल का सिल गया है

गँवा कर अपनी कश्ती सोचते हैं
ग़नीमत है किनारा मिल गया है
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Ajeetendra Aazi Tamaam
किया कर जिस्म की अपने हिफ़ाज़त
ये मिट्टी रूह का घर है मेरी जाँ

गिला कैसा जहाँ रुस्वा करे गर
ये दुनिया तो सितमगर है मेरी जाँ
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Ajeetendra Aazi Tamaam
रहते हैं अपने आप से कुछ बे-ख़बर से हम
जब से हुए हैं रू-ब-रू दर्द-ए-जिगर से हम
Ajeetendra Aazi Tamaam

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