Anjali Sahar

Top 10 of Anjali Sahar

    ज़िंदगी अब कुछ और नहीं दरकार
    मुझे अच्छी भली उदासी है
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    जब से इक शख़्स छोड़ कर गया है
    मेरी सब सेे बड़ी ख़ुशी दुख है
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    है इन दियों का मुक़द्दर भी बेटियों जैसा
    कहाँ बनाए गए और हुए कहाँ रौशन
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    इस का मतलब कि ज़िन्दगी दुख है
    सब यही कहते हैं अजी दुख है

    इस नई नस्ल के हैं ढ़ेरों दुख
    पहला दुख वक़्त की कमी दुख है

    और सुनाओ कि कैसी कट रही है
    और तो क्या है बस वही दुख है

    मुझे मेरा मिज़ाज ले डूबा
    इस ज़माने में सादगी दुख है

    जब से इक शख़्स छोड़ कर गया है
    मेरी सब सेे बड़ी ख़ुशी दुख है

    वैसे तो तेरा दुख बड़ा दुख था
    तेरे बा'द अब तेरी कमी दुख है

    अब तो ये भी समझ से बाहर है
    किस का दुख है जो वाक़ई दुख है

    मुझे सबने यही बताया है
    कि तेरे सीने में कोई दुख है

    मैं तुम्हें भूलने लगी हूँ अब
    मैं समझती थी दाइमी दुख है

    और तो क्या कमाया है हम ने
    सारा सरमाया बस यही दुख है
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    Anjali Sahar
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    लौट कर आए कोई कुछ तो ख़बर हो हम को
    किस जहाँ को चले जाते हैं ये मरने वाले
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    पानी, किरन, हवा भी मुयस्सर नहीं हुए
    ये हौसला है अपना कि बंजर नहीं हुए
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    जिस तरह हो गए जंगल ख़ामोश
    हो रही हूँ मैं मुसलसल ख़ामोश

    मुझ में बाक़ी नहीं चिंगारी भी
    आग होनी ही थी जल जल ख़ामोश

    ख़ास वक़्तों में छलक जाती हूँ मैं
    दरिया रहता नहीं हर पल ख़ामोश

    और ताख़ीर न कर आने में
    हो न जाऊँ मैं मुकम्मल ख़ामोश

    कौन आख़िर तुझे समझाए 'सहर'
    ऐसे रोते नहीं, पागल, ख़ामोश
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    Anjali Sahar
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    जो शख़्स करता रहा बरसों इक मकाँ रौशन
    न जाने कर रहा है कौन सा जहाँ रौशन

    है इन दियों का मुक़द्दर भी बेटियों जैसा
    कहाँ बनाए गए और हुए कहाँ रौशन

    हमारी ओर तो होती है अब बहार उदास
    तुम्हारे होने से तो होगी वाँ ख़िज़ाँ रौशन

    कि इन ग़मों से निकलना बहुत कठिन भी नहीं
    दिल-ओ-दिमाग़ रहे बस रवाँ दवाँ रौशन

    बिछड़ते वक़्त थी माँ बाप के लबों पे दुआ
    ख़ुदा रखे तुझे बिटिया सदा वहाँ रौशन

    यही बनेंगी तुम्हारे भी डूबने का सबब
    जो शक्ल से नज़र आती हैं कश्तियाँ रौशन

    सुख़नवरों में गिना जाएगा तुझे भी सहर
    ख़ुदा बनाए रखे तेरा ये गुमाँ रौशन
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    Anjali Sahar
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    हम हैं चढ़ते हुए दरिया में उतरने वाले
    हम कहाँ तेज़ हवाओं से हैं डरने वाले

    लौट कर आए कोई कुछ तो ख़बर हो हम को
    किस जहाँ को चले जाते हैं ये मरने वाले

    सौ दफ़ा गिर के उठे, उठ के चले हैं सो हम
    सख़्ती-ए-राह से हरगिज़ नहीं डरने वाले

    आप जैसे तो कई देखे हैं हम ने लेकिन
    आप से बढ़ के नहीं देखे मुकरने वाले

    तुम न ज़िद्दी हो न ख़ुद सर न कोई सब्र-ओ-ज़ब्त
    ऐसे होते हैं भला हद से गुज़रने वाले
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    Anjali Sahar
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    पढ़ रहा था वो मेरे चेहरे को
    मैं ने फिर जल्दी से चेहरा बदला
    Anjali Sahar
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