बयाँ होती नहीं तेरी नज़ाकत चंद लफ़्ज़ों में
बयाँ होती तो हो जाती क़ियामत चंद लफ़्ज़ों में
मिरा हर रास्ता तेरी ही गलियों से गुज़रता है
दरीचा बंद था सुन ले शिकायत चंद लफ़्ज़ों में
किया सज्दा बड़ा तेरा तुझे पाने की कोशिश में
कि पूरी हो नहीं सकती इबादत चंद लफ़्ज़ों में
किसी शाइ'र की ग़ज़लों में तिरा ये नाम गर आया
मैं उस शाइ'र की कर दूँगा ज़लालत चंद लफ़्ज़ों में
सुना है शहर भर तेरी ही चर्चा है दिवानों में
मिटा दूँगा या उन को दे हिदायत चंद लफ़्ज़ों में
ये दुनिया गर तुझे देखे मुझे तकलीफ़ होती है
जलन के नाम पर लिख दी इबारत चंद लफ़्ज़ों में
शरीफ़ों ने भी तेरा नाम लिख डाला किताबों में
मैं भर दूँ शहर की हर इक इमारत चंद लफ़्ज़ों में
तिरा बस नाम लेते ही फ़ज़ाओं में घुली ख़ुशबू
फ़ज़ाएँ भी करे तेरी वकालत चंद लफ़्ज़ों में
क़सम तुझ को मिरी ज़ीनत मिरी हर साँस तेरी है
मिरे मरने से पहले सुन मोहब्बत चंद लफ़्ज़ों में
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