Deepak Vikal

Top 10 of Deepak Vikal

    जंगल जंगल भटकेंगे और ख़ुद जंगल हो जाएँगे
    सहराओं पर उड़ने वाला इक बादल हो जाएँगे

    तन्हा छोड़ के जाने वाले तू ने क्या सोचा था हम
    तेरे हिज्र में रक़्स करेंगे और पागल हो जाएँगे
    Read Full
    Deepak Vikal
    3 Likes
    तभी गर्दिश में है तारा हमारा
    किसी ने दिल नहीं तोड़ा हमारा

    न होती नौकरी तो सोचता हूँ
    वो तब भी देखती रस्ता हमारा

    गुलाबी धूप छत पर आ गई है
    निकल आएगा अब चंदा हमारा

    वो सावन और था दिन और थे तब
    तिरी बाँहों में था झूला हमारा

    लगा दी आग रिश्तों में हमीं ने
    हमीं को खा गया ग़ुस्सा हमारा

    किसी की बद्दुआओं का असर है
    समुंदर पी गया सहरा हमारा

    नहीं सदियों रुके आँसू हमारे
    हमीं पर जब खुला क़िस्सा हमारा
    Read Full
    Deepak Vikal
    3 Likes
    भले न कहना कि उस की आँखें बहुत हसीं हैं
    मगर उदासी पे शे'र कहना उदास लोगों

    करो तरफ़दारियाँ उदासी की लाख बेशक
    मगर बुरा है उदास रहना उदास लोगों
    Read Full
    Deepak Vikal
    3 Likes
    कुछ घड़ी दिलकश लगा था मौत का चेहरा मुझे
    और फिर चिल्ला पड़ा मैं ज़िंदगानी के लिए
    Deepak Vikal
    3 Likes
    मुझ सेे अगर ये चाहते हो आदमी रहूँ
    बाज़ार जा रहा हूँ मुझे रोक लीजिये
    Deepak Vikal
    2 Likes
    मेरे नादाँ दिल उदासी कोई अच्छी शय नहीं
    देख सूखे फूल पर आती नहीं हैं तितलियाँ
    Deepak Vikal
    8 Likes
     क्या पता था इस तरह तुझ सेे जुदा हो जाएँगे
    ढूँढ़ने में तुझ को ख़ुद ही लापता हो जाएँगे

    रौशनी की चाह में भटकेंगे पहले दर-ब-दर
    और फिर हम ख़ुद-ब-ख़ुद जलता दिया हो जाएँगे

    इस लिए भी बात अपने दिल की मैं कहता नहीं
    जानता हूँ लोग सब मुझ सेे ख़फ़ा हो जाएँगे

    लोग अक्सर पूछते हैं मुझ सेे तेरी रहगुज़र
    ऐसे तो हम एक दिन तेरा पता हो जाएँगे

    साथ तेरे जाएगी आँखों से ये बीनाई भी
    और आख़िर को सभी मंज़र फ़ना हो जाएँगे

    रास्ता पूछेगा कोई कुछ न बोलेंगे 'विकल'
    हाँ मगर हम ख़ुद उसी का रास्ता हो जाएँगे
    Read Full
    Deepak Vikal
    3 Likes
    कुछ बाहर कुछ भीतर भीतर रोते हैं
    इश्क़ में पड़ने वाले अक्सर रोते हैं

    मेघ गरजते हैं और बारिश होती है
    धरती पर जब मस्त-कलंदर रोते हैं

    तेरे हिज्र में हँसते भी हैं गाते भी
    कैसी वहशत है जो मिल कर रोते हैं

    हम को तो कुछ मछुआरे बतलाते हैं
    झीलें, दरिया और समुंदर रोते हैं

    कुछ लोगों पर होती है रब की नेमत
    कि़स्मत वाले हैं जो खुलकर रोते हैं

    रोना फ़न है जबसे ये मालूम पड़ा
    रोने वाले हम सेे बेहतर रोते हैं
    Read Full
    Deepak Vikal
    3 Likes
    कौन था जिस के उन तक इशारे गए
    बज़्म से यूँँ जो उठकर सितारे गए

    जाते जाते गईं सारी फ़नकारियाँ
    देखते देखते सब नज़ारे गए

    जागते जागते अपनी रातें कटीं
    सोते सोते कई दिन गुज़ारे गए

    उन की ख़ातिर हैं हम महज़ इक पैरहन
    सुब्ह धारे गए शब उतारे गए

    पहले जी भर के रौंदे गए तब कहीं
    चाक पर रख के इक दिन सँवारे गए

    हाए! प्यासों पे गुज़रेगी कैसी ख़ुदा
    वो तो प्यासी नदी के किनारे गए

    कोई आवाज़ देता है उस पार से
    गर गए तो समझना कि मारे गए

    क्यूँँ मुड़े हुस्ने-जानाँ की जानिब 'विकल'
    इक हमीं तो नहीं जो पुकारे गए
    Read Full
    Deepak Vikal
    4 Likes
    हम अपनी ज़ीस्त से बेज़ार होकर
    चले हैं काम पर तैयार होकर

    बहुत दिन बा'द चारा-गर हमारा
    मिला हम को बहुत बीमार होकर

    समुंदर में उभर आए किनारे
    सफ़र जब भी किया मयख़्वार होकर

    हमारी परवरिश भी इक सबब है
    जो तुम को चुभ रहे हैं ख़ार होकर

    न ले जाए चुरा कर ख़्वाब कोई
    कि सोना है मुझे बेदार होकर

    मिरी तक़दीर का रौशन सितारा
    पड़ा होगा कहीं बीमार होकर
    Read Full
    Deepak Vikal
    4 Likes

Top 10 of Similar Writers