Deepika Jain

Top 10 of Deepika Jain

    बनकर हकीम आएँ जो
    ज़ख़्मों को और मसल गए
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    अपने चेहरे पे हँसी हरदम सजाए रखता वो
    सामने दुनिया के झूठा हँस के थकता क्यूँँ नहीं
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    सच्ची उल्फ़त कर के हम दोनों ही पछताएँ यहाँ
    मैं तुझी से हारी लेकिन तू भी जीता क्यूँँ नहीं
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    अपने चेहरे में हँसी हरदम सजाए रखता वो
    सामने दुनिया के झूठा हँस के थकता क्यूँँ नहीं
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    था उसी से इश्क़ और उस सेे रहेगा, या ख़ुदा
    उस ने देखा कुछ ग़लत तो मुझ सेे पूछा क्यूँँ नहीं
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    मोहब्बत खेल है गर तो बताओ
    खिलौना दिल से भी सस्ता है कोई
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    ग़मों को दफ़्न कर हँसता है कोई
    सिसक के रोता वो बच्चा है कोई
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    मेरे हाथों में ग़म का पता देख कर
    रूठती है ख़ुशी गमज़दा देख कर

    अब तो डसने लगी तीरगी भी मुझे
    मेरे हाथों का दीया बुझा देख कर

    रात दिन खाता था प्यार में वो क़सम
    है ख़ुदा हैराँ अब बे-वफ़ा देख कर

    पैसे ले कर जो नेता नहीं डरता, क्यूँ
    डर गया वो ही अब कैमरा देख कर

    जश्न करता रहा रात भर वो रक़ीब
    ख़ुश हुआ था मेरा घर जला देख कर

    मार देती है मांँ अपनी ही भूख 'दीप'
    डिब्बे में खाना अक्सर ज़रा देख कर
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    माँ नहीं "दीप" दुनिया में तेरे पास
    दूर तू कैसे फिर थकान करे
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    मेरे मरने की दुआ माँग रहे थे जो 'दीप'
    बद-दुआ में ही मुझे उन का हुनर लगता है
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