है सहज स्वीकार जो जीवन पे वो अपवाद तुम
    ज़िंदगी अवसाद है अवसाद में उन्माद तुम
    Dhiraj Singh 'Tahammul'
    2 Likes
    घूमता है दिल में मेरे एक नम ख़याल
    किस तरह से खोजते हैं लोग हम ख़याल
    Dhiraj Singh 'Tahammul'
    0 Likes
    इशारों ही में हाल-ए-दिल मैं सारा खोल जाता हूँ
    बहुत ख़ामोश रह कर भी बहुत कुछ बोल जाता हूँ
    Dhiraj Singh 'Tahammul'
    1 Like
    वस्ल की शब इंतज़ारी में मरे कोई यहाँ
    आरज़ू–ए–इश्क़ में क्या–क्या करे कोई यहाँ

    बात कोई हो लबों पे बात उन की आ गई
    और क्या हो आँख को ख़ूँ–ख़ूँ भरे कोई यहाँ
    Read Full
    Dhiraj Singh 'Tahammul'
    6 Likes
    बन कर कसक चुभती रही दिल में मिरे इक आह थी
    ऐ हम–नफ़स मेरे मुझे तुझ सेे वफ़ा की चाह थी
    Dhiraj Singh 'Tahammul'
    24 Likes
    अभी हम को मुनासिब आप होते से नहीं लगते
    ब–चश्म–ए–तर मुख़ातिब हैं प रोते से नहीं लगते

    वही दर्या बहुत गहरा वही तैराक हम अच्छे
    हुआ है दफ़्न मोती अब कि गोते से नहीं लगते

    ये आई रात आँखों को चलो खूँ–खूँ किया जाए
    बदन ये सो भी जाए आँख सोते से नहीं लगते
    Read Full
    Dhiraj Singh 'Tahammul'
    1 Like
    हुस्न बख़्शा जो ख़ुदा ने आप बख़्शें दीद अपनी
    आरज़ू–ए–चश्म पूरी हो मुकम्मल ईद अपनी
    Dhiraj Singh 'Tahammul'
    5 Likes
    ख़ून से जोड़ा हुआ हर ईंट ढेला हो गया
    दो तरफ़ चूल्हे जले औ' घर अकेला हो गया
    Dhiraj Singh 'Tahammul'
    5 Likes
    ज़ख़्म लगे हैं कितने दिल पर याद करूँँ या तुम को देखूँ
    शाद नहीं हूँ मैं तुम को नाशाद करूँँ या तुम को देखूँ

    उम्र गए पे तेरी सूरत और मिरी आँखें टकराईं
    उम्र गए में सोची वो फ़रियाद करूँँ या तुम को देखूँ
    Read Full
    Dhiraj Singh 'Tahammul'
    3 Likes
    फ़क़त हम ही नहीं रुसवा हुए हैं जान दिल्ली में
    कई शाहों के टूटे हैं यहाँ अरमान दिल्ली में
    Dhiraj Singh 'Tahammul'
    4 Likes

Top 10 of Similar Writers