जब किया इज़हार तो हंँस कर मुझे कहने लगी
    प्यार से दो बात करना प्यार हो जाता है क्या
    Dipendra Singh 'Raaz'
    8 Likes
    ये सोच कर के कि उस ने किया है याद मुझे
    मैं मेरी उँगलियों पे हिचकियों को गिनता रहा

    पलट के उस ने कराया न मुझ को चुप लेकिन
    तमाम रात मेरी सिसकियों को गिनता रहा
    Read Full
    Dipendra Singh 'Raaz'
    8 Likes
    हिज्र का फर्ज़ निभाया है मैं ने शिद्दत से
    साल दो साल तलक मैं भी रहा हूँ तन्हा

    ख़्वाब तुम ने जो दिखाए थे मुझे उल्फ़त में
    मैं जनाज़े के तले उन के दबा हूँ तन्हा
    Read Full
    Dipendra Singh 'Raaz'
    6 Likes
    हिज्र में अब वो रात हुई है जिस
    में मुझ को ख़्वाबों में
    रेल की पटरी, चाकू, रस्सी, बहती नदियाँ दिखती हैं
    Read Full
    Dipendra Singh 'Raaz'
    2 Likes
    दुखी रहने की आदत यूँंँ बना ली है कि अब कोई
    ख़ुशी का ज़िक्र भी कर दे तो फिर तकलीफ़ होती है
    Dipendra Singh 'Raaz'
    4 Likes
    तमाम बातें जो चाहता था मैं तुम सेे कहना
    वो एक काग़ज़ पे लिख के काग़ज़ जला दिया है
    Dipendra Singh 'Raaz'
    1 Like
    नई नस्लें समझ पाएँ मुहब्बत के मआ'नी
    हमें इस वास्ते भी शा'इरी करनी पड़ेगी
    Dipendra Singh 'Raaz'
    32 Likes
    आज फिर आया नहीं मैसज तुम्हारा
    आज फिर ग़ुस्सा निकाला आइने पर
    Dipendra Singh 'Raaz'
    2 Likes
    मुहब्बत दूसरी बारी भी हो सकती है तुम सेे पर
    यक़ीं वापस से अब तुम पर दोबारा हो नहीं सकता
    Dipendra Singh 'Raaz'
    6 Likes
    सीने से लगा लो मुझे तुम इक दफ़ा आ कर
    स्वेटर से मेरी जान ये सर्दी नहीं रुकती
    Dipendra Singh 'Raaz'
    28 Likes

Top 10 of Similar Writers