Dipendra Singh 'Raaz'

Dipendra Singh 'Raaz'

@dipendra-singh

Dipendra Singh 'Raaz' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Dipendra Singh 'Raaz''s shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
यूँँ तेरी याद मुझे कब नहीं आती है मगर
ऐसे मौसम में तेरी याद बहुत आती है
Dipendra Singh 'Raaz'
मैं उसे साथ तो रख लेता किताबों की तरह
पर वो हर साल बदलता है निसाबों की तरह

जब हुआ दिल तो वो आया न हुआ दिल तो नहीं
वो हक़ीक़त में भी आता है तो ख़्वाबों की तरह
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Dipendra Singh 'Raaz'
वो इक गली जिसे छोड़ हुए मुझे बरसों
न जाने क्यूँ मेरे ख़्वाबों में रोज़ आती है
Dipendra Singh 'Raaz'
अब उस गली में अमूमन तो मैं नहीं जाता
कभी कभार कोई याद खींच लेती है
Dipendra Singh 'Raaz'
जल्द लौट आओ तुम तो बेहतर है
वक़्त इतना नहीं के राह तके
Dipendra Singh 'Raaz'
वो अपने ज़ेहन में रखती थी पहले मुझ को फिर
वो मेरा नाम बनाती थी अपने हाथों पे
Dipendra Singh 'Raaz'
हम को तन्हाई मुयस्सर हुई तो इल्म हुआ
ये सुकूँ वो है जो बाहों में नहीं मिलता है
Dipendra Singh 'Raaz'
इज़्ज़त-ओ-आबरू के डर से फिर इक वालिद ने
अपनी बेटी की मोहब्बत का गला घोंट दिया
Dipendra Singh 'Raaz'
इश्क़ में ख़ुद को मैं बर्बाद नहीं कर सकता
एक औरत के बुढ़ापे का सहारा हूँ मैं
Dipendra Singh 'Raaz'
मैं कैसे चैन से सोऊँ यहाँ पर
तेरी यादों से कमरा भर गया है
Dipendra Singh 'Raaz'
मुझ को उस की कॉल भी आई नहीं इस ईद पर
जो गले लग कर मुबारकबाद देता था मुझे
Dipendra Singh 'Raaz'
सतह से तह तलक होना पड़ेगा गर्क ही तुम को
समुंदर के किनारे पर कभी मोती नहीं मिलते
Dipendra Singh 'Raaz'
नज़र आईं न मुझ को वो जब अपने घर के आगे
तो धीमी पड़ गई धड़कन मेरी फिर दर के आगे

तरस खाकर मेरी हालत पे वो रोती रही पर
क़दम अपने बढ़ा पाई न अपने डर के आगे
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Dipendra Singh 'Raaz'
घर आते ही लिपट जाती हैं मुझ सेे
तेरी यादें भी बीवी की तरह हैं
Dipendra Singh 'Raaz'
ज़िंदगी मान बैठते हैं जिसे
छोड़ जाता है क्यूँ वो ही तन्हा
Dipendra Singh 'Raaz'
याद तन्हाई में आता है तुम्हारा कहना
दीप तुम को कभी तन्हा नहीं छोड़ूँगी मैं
Dipendra Singh 'Raaz'
हँसी उदासी में बह गई है
ख़ुशी तसव्वुर में रह गई है
Dipendra Singh 'Raaz'
जब से पंछी खो गए हैं
पेड़ गूँगे हो गए हैं

मौत जैसा कुछ नहीं है
थक चुके जो सो गए हैं
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Dipendra Singh 'Raaz'
हँसते हुए चेहरों को कमल कौन कहेगा
जब हम ही न होंगे तो ग़ज़ल कौन कहेगा

ये फ़िक्र मुझे उस सेे बिछड़ने नहीं देगी
मैं हूँ न हमेशा उसे कल कौन कहेगा
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Dipendra Singh 'Raaz'
अश्क, तन्हाई, ग़म-ए-हिज्र, उदासी, वहशत
ये सभी लफ़्ज़ निचोड़े तो जा के इश्क़ बना
Dipendra Singh 'Raaz'

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