Om Shukla

Top 10 of Om Shukla

    "जंग"
    एक जंग जो हम ने शुरू की एक रोज़ माजी की याद में
    मन के बयाबान के किसी शजर की डालियों के टूट कर रगड़ने से सुलगी हुई चिंगारी से
    किसी टापू पर बसाए गए शहरों की ऊँची बालकनियों से
    मुहब्बत से बने पुल के टूटे हुए मेहराब पर बैठी तितलियों से
    पुरानी किताब के मुड़े हुए पन्ने के कोने पर लिखी तारीखों से
    उन तकलीफ़ों से जो तेरी कमी के बा'द मेरे सीने पर पहाड़ बन गई हैं
    उन सभी सायों से जो कभी थे ही नहीं,लेकिन मैं ने महसूस किया है
    उन सिलवटो से जो दालान में पड़ी चारपाई के बिस्तरे पर सिमटी हुई हैं
    उन आँखों से जिन
    में कोई झील नहीं,लेकिन भरी रहती हैं
    उस चाय की दुकान से जहाँ पर न जाने कितने मिट्टी के कपों को हम ने तुम्हारे होंठ समझ कर चूमा है
    उन सभी गजलों से जिन को तुम्हें याद कर के लिखा है
    उस बलिश्त से जिस को अपने सिरहाने रख कर सोए हैं,रोए हैं
    उन परिंदों से जिन्हें हम ने साथ में बैठ कर दाने खिलाये हैं
    उस गुलाब से जिस की पंखुड़ियों की महक तुम्हारे जिस्म से आती रही है
    और शाम को पौने सात बजे तुम्हारे शहर जाती उस ट्रेन से भी

    जंग शायद सब सही कर दे,मुहब्बत ने तो लगभग नेस्तनाबूद कर दिया है
    हम तुम्हारी याद के हुक्के को पिएँगे और अपने होंठों से उदासी का धुआँ फूंकते रहेंगे
    Read Full
    Om Shukla
    10
    1 Like
    "हिज्र में मारी गईं नज़्में"
    सर्द रात में आँखों पर पड़ी ओस से उतारी गई नज़्में
    सिसकती हैं,चीख़ती हैं ,हिज्र में मारी गई नज़्में

    तुम तक अब आवाज नहीं जाती मेरी
    तुम तक अब मेरे ख़त भी नहीं जाते हैं
    ये साए,ये अलमारियाँ,ये किताबें,ये कमरा
    लौट आओ ना,सब तुम्हें बुलाते हैं
    तेरे गालों पर मेरे हाथ हुआ करते थे
    सुबह-ओ-शाम हम साथ हुआ करते थे
    अब तन्हाई सिरहाने बैठ जाती है
    तुम्हारी याद यकायक आ ही जाती है
    एक क़िस्सा है जिस का छोर नहीं पाता हूँ
    रोना छोड़ दिया है,बे-सबब मुस्कराता हूँ
    एक चेहरा है जिसे भूल नहीं पाऊँगा
    एक चेहरे पर मैं कितनी नज़्म गाऊँगा!
    एक उम्मीद है तेरे लौट आने की मगर
    ये माजी तो मेरी जान लिए जाता है
    तेरा नाम लिखना और मिटाना रेत से
    इस का सिवा मुझे कुछ और कहाँ आता है

    धूप भी नहीं आती है दरीचों से
    रेत भी अब ख़त्म है सेहराओं से
    मन बोझिल सा,परेशान सा है
    तेरी याद रिसती है मेरे घावों से
    कोई है जो मेरा हाथ पकड़ने को है
    बेवजह की बात पर मुझ सेे लड़ने को है
    तू बता तेरी जगह कैसे दे दूँ
    अपना हिस्सा ख़ुद ही कैसे खो दूँ
    तू बता तू लौट कर आएगा ना?
    तू बता मेरी नज़्म तू गायेगा ना?
    कुछ गैर ज़रूरी बातें तुझ सेे करनी है
    तेरी मोहब्बत से अपनी कब्र भरनी है
    ये मौसम मुझे कितना अजीज था
    इक वक़्त तू मेरे कितना क़रीब था
    मुहब्बत से लड़ाई! हार जाएगा
    मुझे मालूम है! तू न आएगा!

    सर्द रात में आँखों पर पड़ी ओस से उतारी गई नज़्में
    सिसकती हैं,चीख़ती हैं ,हिज्र में मारी गई नज़्में
    Read Full
    Om Shukla
    9
    1 Like
    यही तो मसअला है ना तुम्हारे दूर जाने पे
    तुम्हारे ख़्वाब आएँगे, तुम्हारी याद आएगी
    Om Shukla
    18 Likes
    चाहा तुझे माँगू, फिर न सितारे टूटे
    आँख भर आईं, दिल के किनारे टूटे

    जिस की थी चाहत फ़क़त वो न मिला
    देखे थे हमनें जो वो ख़्वाब हमारे टूटे

    उस नदी ने अपना रस्ता बदल लिया
    हम थे कोई सेहरा, जिस के सहारे टूटे

    उस के लम्स में कोई जादू था यक़ीनन
    हम भी तो उस शब इश्क़ में हारे, टूटे

    तुम्हें भी अंदाज़ा हो ग़मनशीं होने का
    कोई सानेहा तुम पे भी मेरे प्यारे टूटे
    Read Full
    Om Shukla
    2 Likes
    बेमलतब की बातों पर इतना ग़ुस्सा ठीक नहीं
    उदासी तो चल जाती है,लेकिन रोना ठीक नहीं

    ख़ुशियाँ सारी खा जाएगी,दे जाएगी ढेरो ग़म
    सोच के करना जब भी करना,प्यार वगैरा ठीक नहीं

    आए वो और फूल पर बैठे , तुम उधेड़ दो पीठ
    यार मेरे उस तितली को ऐसे बहकाना ठीक नहीं

    उस ने मेरी नाव डुबोई, उस से ही सीखी तैराकी
    मैं आख़िर ये कैसे कह दूँ कि वो दरिया ठीक नहीं

    साथ तेरे रहते हैं लोग लेकिन करते नहीं मुहब्बत
    या'नी लड़का ठीक तो है, लेकिन ज़्यादा ठीक नहीं

    कब तक गैरों का ग़म, ढोवोगे काँधे पर 'ओम'
    तुम को ही खा जाएगी ये, ऐसा करना ठीक नहीं
    Read Full
    Om Shukla
    2 Likes
    पेशानी को चूमो मेरे, बालों को सहलाओ ना
    अकेले मैं मर जाऊँगा, अब तो वापस आओ ना
    Om Shukla
    6 Likes
    तुम ने रोका नहीं है, अब चला जाऊँगा
    ये धोखा नहीं है, अब चला जाऊँगा

    तुम ने बताया नहीं इश्क़ है या नहीं
    तुम ने सोचा नहीं है, अब चला जाऊँगा

    मुहब्बत भी न करूँं और ठहर भी जाऊँ
    ऐसा होता नहीं है, अब चला जाऊँगा

    मेरे जाने से कौन सा तुम परेशाँ होंगे
    तू तो रोता नहीं है, अब चला जाऊँगा

    तुम कब तक शरीक-ए-ग़म रहोगे 'ओम'
    तुम भी जाओ, मैं भी अब चला जाऊँगा
    Read Full
    Om Shukla
    1 Like
    अब तो पास मेरे कुछ भी मुस्कराने को नहीं
    अब के गर गया फिर मैं लौट आने को नहीं
    Om Shukla
    1 Like
    अब तो मैं बिल्कुल नहीं ठहरने वाला
    अब चला चल ये मेरी अना ने कहा है
    Om Shukla
    1 Like
    हो गया हूँ शाइ'र सा,
    दिल में है कुछ ख़ंजर सा

    तुम अब अपने लगते हो,
    कह लो इस को दिलबर सा

    नया नया सब सीख रहा हूँ,
    पाया तुम को रहबर सा

    हम को तुम सेे इश्क़ हुआ है
    पहन लो हम को जेवर सा

    उतने ज़रूरी हो अब तुम
    शादी में ज्यूँ कोहबर सा

    याद ऐसे आते हो तुम
    ससुराल में पीहर सा
    Read Full
    Om Shukla
    1 Like

Top 10 of Similar Writers