हमारे बा'द अब महफ़िल में अफ़्साने बयाँ होंगे
    बहारें हम को ढूँढेंगी न जाने हम कहाँ होंगे

    इसी अंदाज़ से झूमेगा मौसम गाएगी दुनिया
    मोहब्बत फिर हसीं होगी नज़ारे फिर जवाँ होंगे

    न हम होंगे न तुम होगे न दिल होगा मगर फिर भी
    हज़ारों मंज़िलें होंगी हज़ारों कारवाँ होंगे
    Read Full
    Majrooh Sultanpuri
    2 Likes
    पहले सौ बार इधर और उधर देखा है
    तब कहीं डर के तुम्हें एक नज़र देखा है
    Majrooh Sultanpuri
    70 Likes
    दिल की तमन्ना थी मस्ती में मंज़िल से भी दूर निकलते
    अपना भी कोई साथी होता हम भी बहकते चलते चलते
    Majrooh Sultanpuri
    36 Likes
    मुझ से कहा जिब्रील-ए-जुनूँ ने ये भी वही-ए-इलाही है
    मज़हब तो बस मज़हब-ए-दिल है बाक़ी सब गुमराही है
    Majrooh Sultanpuri
    23 Likes
    अलग बैठे थे फिर भी आँख साक़ी की पड़ी हम पर
    अगर है तिश्नगी कामिल तो पैमाने भी आएँगे
    Majrooh Sultanpuri
    27 Likes
    सुतून-ए-दार पे रखते चलो सरों के चराग़
    जहाँ तलक ये सितम की सियाह रात चले
    Majrooh Sultanpuri
    19 Likes
    ऐसे हँस हँस के न देखा करो सब की जानिब
    लोग ऐसी ही अदाओं पे फ़िदा होते हैं
    Majrooh Sultanpuri
    43 Likes
    शब-ए-इंतिज़ार की कश्मकश में न पूछ कैसे सहर हुई
    कभी इक चराग़ जला दिया कभी इक चराग़ बुझा दिया
    Majrooh Sultanpuri
    25 Likes
    देख ज़िंदाँ से परे रंग-ए-चमन जोश-ए-बहार
    रक़्स करना है तो फिर पाँव की ज़ंजीर न देख
    Majrooh Sultanpuri
    22 Likes
    मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर
    लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया
    Majrooh Sultanpuri
    67 Likes

Top 10 of Similar Writers