तू ही तो सब सेे पास है
तुझ सेे मेरा हर श्वास है
देखो ख़ुदा ये हर जगह
मौजूद है एहसास है
नूर-ए-हक़ीक़त पा लिया
फिर हर नज़ारा ख़ास है
जब तू मिला तो मिट गई
इस आत्मा की प्यास है
मुझ बे-अदब मग़रूर को
रहम-ओ-करम की आस है
ये इश्क़ हासिल है उसे
जिस का अटल विश्वास है
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