Manmauji

Top 10 of Manmauji

    न तो कामिल न ही तामीर में हैं
    हमारे ख़्वाब अभी ज़ंजीर में हैं

    अभी कुछ मश्क़ बाक़ी है मुसव्विर
    अभी कुछ ख़ामियाँ तस्वीर में हैं

    तेरी ज़ुल्फ़ों में जितने ख़म हैं उन सेे
    ज़ियादा तो मेरी तक़दीर में हैं

    वसीयत में बताओ क्या लिखूँ मैं
    तजरबे ही मेरी जागीर में हैं

    क़वाफ़ी जी़स्त के निभने न देंगे
    जो नुक़्ते बख़्त की तहरीर में हैं
    Read Full
    Manmauji
    1 Like
    आरज़ू अब के बद-हवा से न थी
    हम को क़िस्मत से इतनी आस न थी

    आज पहली दफ़ा शराब चखी
    उन के होंठों के आस-पास न थी

    वक़्त-ए-रुख़्सत वो हम को चेहरे से
    लग रही थी मगर उदास न थी

    बा'द मुद्दत के उन का फ़ोन आया
    नर्म लहजा था पर मिठास न थी

    शक्ल ही ऐसी कुछ मिली थी हमें
    वजह उदासी की कोई पास न थी

    शरबतों से बुझा भी लेते मगर
    इतनी जाहिल हमारी प्यास न थी
    Read Full
    Manmauji
    1 Like
    तुम्हें कोई परेशानी नहीं तो
    हमें लग तो रहा जानी नहीं तो

    चलो माना ये सुर्ख़ी नींद की है
    तो फिर ये आँख में पानी नहीं तो

    मिटा ख़ुद को रहा जिस के लिए तू
    तेरी वो भी है दीवानी नहीं तो

    उसे अहल-ए-मुसाहिब कर लिया है
    मगर क्या ज़ात पहचानी नहीं तो

    ग़ज़ल पर वाहवाही दी नवाज़िश
    समझ में आ गए मा’नी नहीं तो

    मिला क्या कुछ नहीं दुनिया में ‘मौजी’
    मिले माँ-बाप के सानी नहीं तो
    Read Full
    Manmauji
    2 Likes
    तुम्हें लहू से तो ख़त लिख नहीं सके लेकिन
    लिखी है आँख के पानी से शा'इरी तुम पर
    Manmauji
    2 Likes
    तू माँ है बहन है तू बेटी है नारी
    ये सृष्टि तुम्हीं से है सारी की सारी

    है तर्पण समर्पण अलंकार तेरे
    जटा से तभी शिव ने भू पर उतारी

    नहीं कोई शक्ति का पर्याय तुम सा
    मगर आदमी की कुदृष्टि से हारी

    उरस्थल का तेरे ये प्रारब्ध कैसा
    तेरा दूध बन बैठा तेरा शिकारी

    उठो मानवी रण की भेरी बजा दो
    विजय हो तुम्हारी विजय हो तुम्हारी
    Read Full
    Manmauji
    0 Likes
    कलाम कर रहा हूँ ख़ुद ही से मैं दर्पन में
    ख़ुशी समा ही नहीं पा रही है दामन में

    बदन का बोझ फ़क़त साथ चल रहा है मेरे
    उलझ के रह गया है मन किसी के कंगन में

    रखे वो पाँव ज़मीं पर तो ग़ौर से सुनना
    सुनाई दूँगा हसीं पायलों की छन छन में

    मैं माँगता था जिसे आसमाँ से शाम-ओ-सहर
    वो चाँद ख़ुद ही उतर आया मेरे आँगन में

    मुझे ये डर है न लग जाए चोट सीने पर
    धड़क रहा है मुसलसल वो मेरी धड़कन में
    Read Full
    Manmauji
    1 Like
    ज्वाइन ही कर रहा था मैं बजरंग दल मगर
    देखा तुम्हें,इरादा मेरा डगमगा गया
    Manmauji
    2 Likes
    अगर हो नक़्ल में माहिर, तो दोहरा कर दिखाओ ये
    हमें तुम से मुहब्बत है, हमें तुम सेे मुहब्बत है
    Manmauji
    0 Likes
    बा'द मुद्दत के हम ने घर देखा
    यूँँ लगा ज्यूँँ ख़ुदा का दर देखा

    खिड़कियाँ देखी,बाम ओ दर देखा
    फिर दीवारों को आँख भर देखा

    इक शजर रोया देख कर मुझ को
    ला-मकानी का जब असर देखा

    उस ने आँखों में झाँकना चाहा
    आँख नम थी, इधर उधर देखा

    याद बाबा की ख़ूब आई हमें
    हम ने जब माँ का सूना सर देखा
    Read Full
    Manmauji
    1 Like
    आज पहली दफ़ा शराब चखी
    तेरे होंठों के आस-पास न थी
    Manmauji
    1 Like

Top 10 of Similar Writers