वो इश्क़ में भी रहते हैं जो होश में
    कहते हैं झूठ उन को मोहब्बत है नहीं
    Praveen Bhardwaj
    1 Like
    चाहो मुझे तो रोक लो लग जाओ सीने से
    मैं जा रहा हूँ आँख से ओझल नहीं हुआ
    Praveen Bhardwaj
    1 Like
    जहाँ कैसे हुआ रौशन ये कैसा फ़लसफ़ा है देख
    ये किस की आँख का तारा फ़लक से जा लगा है देख

    ये कैसे जी रहे हैं हम है कैसी ज़िंदगी अपनी
    किसी का कुछ बिगाड़ा या किसी की बद-दुआ है देख

    सभी ने कर दिया मुझ को नज़र-अंदाज़ जाने क्यूँँ
    सभी की आँख में अटका हुआ हूँ क्या किया है देख

    जो भी गुम हो गया था कल वो अबतक लौट आया है
    कहाँ नाराज़ होते हो किधर वो खो गया है देख

    यही समझा नहीं अबतक किया सबपे भरोसा क्यूँ
    सभी ने तोड़ डाला फिर से मेरा हौसला है देख

    हमारे फूल पर ये सब कहाँ से तितलियाँ आई
    हमारे दिल के आँगन को भी कब्ज़ा क्यूँँ किया है देख

    नहीं आराम अपना है नहीं है दिल-लगी अपनी
    रखो तुम हर ख़ुशी अपनी हमें ग़म मिल गया है देख

    किसी से हारने का ग़म हमें होता नहीं है अब
    सभी को जीतना होगा मुझे तो हारना है देख
    Read Full
    Praveen Bhardwaj
    1 Like
    जिसे तुम भूलना चाहो वही बस याद आता है
    जिसे तुम याद करते हो उसे ही भूल जाते हो
    Praveen Bhardwaj
    1 Like
    एक वक़्त से यारों की दिल-लगी चल रही हैं
    जिस तरह से भी चले ज़िन्दगी चल रही हैं

    तू बता क्या रुख हैं हवाओं का तेरे यहाँ
    हमारे यहाँ तो बस हल्की-हल्की चल रही हैं

    ये वक़्त हैं की चाहो तो ख़रीद लो मकाँ मेरा
    इस वक़्त मेरे सामने एक बेबसी चल रही हैं

    मेरे दोस्तों के दुश्मनों से ता'उम्र मेरी दुश्मनी
    मेरे दुश्मनों से दोस्तों की, दोस्ती चल रहीं हैं

    जिन के महफ़िलों में मेरे नाम पे भी पाबंद हैं
    उन के महफ़िलों में मेरी शा'इरी चल रही हैं
    Read Full
    Praveen Bhardwaj
    2 Likes
    लोग मरने लगे हैं अब हवा के लिए
    इतनी जद्दोजहद एक दवा के लिए

    हमें वक़्त रहते ये जान लेना हैं की
    कोई खर्च नहीं लगता दुआ के लिए

    हम सेे भी पूछिये हमारा हाल-चाल और
    अपना भी ख़याल रखें ख़ुदा के लिए

    अकेलापन भी मार सकता हैं इस वक़्त
    किसी को छोड़ मत देना कज़ा के लिए
    Read Full
    Praveen Bhardwaj
    3 Likes
    मेरा सब कुछ भी तेरे लिए काफ़ी नहीं था
    तू मेरे लिए काफ़ी था, मैं काफ़ी नहीं था

    इस वजह से भी रात को ढालना पड़ा था
    चाँद का रौशन होना तुझे काफ़ी नहीं था
    Read Full
    Praveen Bhardwaj
    1 Like
    ख़्वाब ये था कि रात तेरी बाहों में कटे
    कुछ इस तरह से रात मेरे ख़्वाबों में कटे
    Praveen Bhardwaj
    1 Like
    इश्क़ के अलावा हैं तुझे कई और भी काम
    कैसी आशिक़ी हैं तुझे तो मर जाना चाहिए
    Praveen Bhardwaj
    4 Likes
    तेरी मर्ज़ी थी तू चाहे जो बना देता मेरा लेकिन
    तू ने आदमी तोड़ कर पत्थर नहीं बनाना था
    Praveen Bhardwaj
    3 Likes

Top 10 of Similar Writers