Praveen Bhardwaj

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Praveen Bhardwaj shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Praveen Bhardwaj's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
कोई कब समझता है कितनी दूर है मंज़िल
कितना दूर हम सेे हम कितना दूर दिल से दिल
Praveen Bhardwaj
बातें ग़लत-सही की करता भी कौन है
गूँगे जो थे सो हैं और बाक़ी भी मौन हैं
Praveen Bhardwaj
अम्न की बातें वो भी नासूर के साथ
जंग ज़ाहिर है तो है मग़रूर के साथ
Praveen Bhardwaj
तलवार आदमी की है ये हाथ आदमी के हैं
क्यूँ कट रहे हैं आदमी हैवानियत तो देखिए
Praveen Bhardwaj
किरदार चाहता है की बस ग़म निकाल दें
हम भी तो चाहते यही है हम निकाल दें

तुम चाहते हो इस
में की बस तुम नहीं रहो
'मैं' नइँ बचेगा इस
में अगर 'हम' निकाल दें
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Praveen Bhardwaj
इक तू था तो थे मेरे भी साहिल
इक तू नइँ तो अब दरिया भी नइँ हूँ
Praveen Bhardwaj
ये फूल तेरे बाग़ के बस नाम के ही फूल हैं
तुम खिल रहे हो जैसे वैसे कोई भी खिलता नहीं
Praveen Bhardwaj
कहाँ आते हैं वो चले जाते हैं जो
कहो आ रहे हैं अगर जा रहे हो
Praveen Bhardwaj
हमें इस बात का दुख था तुम्हें किस बात का दुख है
तुम्हें उस बात का दुख था हमें जिस बात का दुख है
Praveen Bhardwaj
तुम को नज़र अंदाज़ करता ज़िंदगी में करता नइँ
तुम कर रहे जो इश्क़ में मैं दुश्मनी में करता नइँ
Praveen Bhardwaj
कभी तो हम दरख़्तों से भी पूछो क्या हमें ग़म है
नहीं है डाल पर इक फल नहीं हैं घोंसला कोई
Praveen Bhardwaj
एक तो ख़ुद मेरी आदत ख़राब है
और तो और मेरी सोहबत ख़राब है

ख़ुद ही रहता हूँ क़िस्मत के भरोसे
ख़ुद ही कहता हूँ क़िस्मत ख़राब है
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Praveen Bhardwaj
वो इश्क़ में भी रहते हैं जो होश में
कहते हैं झूठ उन को मोहब्बत है नहीं
Praveen Bhardwaj
वो इश्क़ में भी रहते हैं जो होश में
कहते हैं झूठ उन को मोहब्बत है नहीं
Praveen Bhardwaj
किसे रोकें चले जाएँगे हम भी
जिसे जाना था वो मर के गया है
Praveen Bhardwaj
लग गया वक़्त भी मगर यार देख
आ गया हूँ मैं भी नदी पार देख
Praveen Bhardwaj
कहाँ इक तीर भी सीने पे लग पाया
मैं घाइल भी हूँ जैसे है उसी का ग़म
Praveen Bhardwaj
कोई ग़म है तो बता के देख मुझे
या अपने दिल से लगा के देख मुझे

ग़ैरों की बातों पर मत यक़ीन कर
तू कभी ख़ुद भी तो आ के देख मुझे
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Praveen Bhardwaj
नहीं वो मैं नहीं जिस को मिला हैं सब सेे ज़्यादा घाव
किसी के दिल निकाले गए किसी की जान ले ली गई
Praveen Bhardwaj
मैं वो कश्ती हूँ जो लाया है सब को किनारे तक
मैं वो दरिया हूँ जिसे मुड़कर नहीं देखता है कोई
Praveen Bhardwaj

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