ज़माने से ये कहने को कलेजा चाहिए जानाँ
    तुम्हारे बा'द भी तुम सेे मुहब्बत कर रहा हूँ मैं
    Pushpendra Panchal
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    चश्म भी नम मिलेंगे नए साल में
    कुछ नए ग़म मिलेंगे नए साल में

    आज तक यार तन्हा रहे जिस तरह
    उस तरह हम मिलेंगे नए साल में
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    Pushpendra Panchal
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    अचानक छोड़ कर जाने से तेरे
    मेरी आँखों से दरिया बह रहा है
    Pushpendra Panchal
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    मैं ने पूछा तो मुहब्बत को इबादत ही कहा सबने
    अब अगर करने को कहता हूँ तो आख़िर क्यूँ नहीं करते
    Pushpendra Panchal
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    भुलानी है अगर दुनिया तो ये सब सेे मुनासिब है
    मुहब्बत के अलावा दूसरा चारा नहीं कोई
    Pushpendra Panchal
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    मैं दिन का सारा वक़्त किसी को दे सकता हूँ
    हर रात मुझे तन्हाई में रोना होता है
    Pushpendra Panchal
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    मुनासिब है मनाने पर तिरे यूँँ मान जाना
    भला मुझ को मनाता कौन है तेरे अलावा
    Pushpendra Panchal
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    बुरा हूँ मैं मुझे अच्छा नहीं बनना
    किसी के पाँव का जूता नहीं बनना

    ज़माने ने लगाईं ठोकरें मुझ को
    किसी का अब पसंदीदा नहीं बनना
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    Pushpendra Panchal
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    पहले से अब गुल में ख़ुशबू ज़्यादा है
    या'नी मुझ में मैं कम और तू ज़्यादा है
    Pushpendra Panchal
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    मुझ को हीरा कह रहे हो पर न करता हूँ यक़ीं
    गर जो होता ये सही तो टूटता बिल्कुल नहीं
    Pushpendra Panchal
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