Rachit Sonkar

Top 10 of Rachit Sonkar

    एक रिश्ते को किस की नज़र लग गई
    हिज्र को फिर हमारी ख़बर लग गई
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    वो समझती है उस का हुनर है फ़क़त
    इश्क़ में बे-वफ़ा हम भी हो सकते हैं
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    महफ़िल में बैठे लोगों को भाने लगी
    जब वो मेरे अश'आर फ़रमाने लगी
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    मत करो अपनी तुलना किसी और से
    सारे फूलों की होती है ख़ुश्बू अलग
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    ज़रा-ज़रा सा मैं मर रहा हूँ
    तुम्हारे दिल से उतर रहा हूँ

    क़सम तो खाई थी मैं ने फिर भी
    मैं उस के दर से गुज़र रहा हूँ

    कोई तो मुट्ठी में बाँधे मुझ को
    कि रेत जैसा बिखर रहा हूँ

    तुम्हीं हो ख़ुशबू तुम्हीं फ़ज़ा हो
    मैं तुम सेे मिल कर निखर रहा हूँ

    हमेशा सच ही कहाँ है मैं ने
    इसी लिए मैं अखर रहा हूँ

    मिली नहीं है नज़र अभी तक
    मैं तुम सेे मिलने को मर रहा हूँ
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    दूसरा मौक़ा तो ख़ुद को भी नहीं देते हम
    और वो रोते हुए कह रही सॉरी बाबू
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    हक़ीक़तों की तल्ख़ियाँ भी मीठे ख़्वाब की तरह
    मुझे शराब दे रही है वो गुलाब की तरह
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    मेरी ज़िंदगी में सब कुछ, है मगर ख़ुशी नहीं है
    ये है तल्ख़ इक हक़ीक़त, कोई शा'इरी नहीं है

    भले कह दिया है उस से, मुझे इश्क़ है तुम्हीं से
    हाँ मेरी तरफ़ वो लेकिन, अभी देखती नहीं है

    हुआ क़ैद इश्क़ में जब, तो समझ में मेरी आया
    जुदा हो के तुम सेे मेरी, कोई ज़िंदगी नहीं है

    जिसे चाहता हूँ हर दिन, जिसे पूजता हूँ हर दिन
    मेरे ख़्वाब की वो लड़की, अभी तक मिली नहीं है

    ये जो मेरी ज़िंदगी है, ये तुम्हारी है अमानत
    ये जो मेरी ज़िंदगी है, मेरी ज़िंदगी नहीं है
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    वो मुझे छोड़ कर जा रही हैं
    ये उदासी मुझे खा रही हैं

    लग रहा तेरे जाने से मुझ को
    अब क़यामत कोई आ रही हैं
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    वो धूप में आई है छत पे बैठने
    पहली दफ़ा इक चाँद दिन में देखा है
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