Atul K Rai

Top 10 of Atul K Rai

    तेरे दर पर तेरी ख़ातिर बता ना
    हमें रोना पड़े, अच्छा लगेगा?
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    ज़रा धैर्य रखिए सघन वन दिखेगा
    ये पेड़ों के पत्ते गिराने के दिन हैं
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    मर्म हँसने का समझ पाए ज़रा हम देर से
    वस्ल जिस को कह रहे थे हिज्र की बुनियाद थी
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    पुराने घाव पर नाखून उस का लग गया वरना
    गुज़र कर दर्द ये हद से दवा होने ही वाला था
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    मुहब्बत में जो माथा चूम कर वा'दा किया उस ने
    उसे भी आम बातों का ही दर्जा दे दिया उस ने

    सुधा के नाम पर विषपान अब हम सेे नहीं होगा
    सुना ज्यूँँ ही मुहब्बत से किनारा कर लिया उस ने
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    गिरो तो इतनी ऊँचाई से गिरना
    लगे जैसे हवा में उड़ रहे हो
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    मज़ा चहिए जो आख़िर तक उदासी से मोहब्बत कर
    ख़ुशी का क्या है कब तब्दील है से थी में हो जाए
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    वही लड़की जो गोरी थी वही काली निकलती है
    अगर साज़िश के पीछे आप की वाली निकलती है

    कभी ससुराल जा कर के मना कर देखिए होली
    कभी सरहज निकलती है कभी साली निकलती है

    मुहल्ले की सभी भउजाइयों का रंग देवर पर
    उतरता है तो बरबस होंट से गाली निकलती है

    करें क्या हम कहो जानांँ कहीं टिकुली कहीं पायल
    कहीं तकिए के नीचे कान की बाली निकलती है

    जहाँँ सब लोग पागल हैं करें सब क़ैद मुट्ठी में
    सभी की अंत में मुट्ठी वहीं ख़ाली निकलती है
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    जिसे मंज़िल बताया जा रहा था
    वो रस्ते के सिवा कुछ भी नहीं है
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    लटकन झटकन ओढ़ मटकते एक परी का दिख जाना,
    प्लेन गुजरने पर बचपन के ख़ुश होने सा लगता है!

    बिन्दी, लिपस्टिक, चूड़ी, कंगन और किनारा साड़ी का,
    लाल कलर पर कब्ज़ा अय हय कितना अच्छा लगता है!
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