तभी वो बहस में जीती हुई है
    कि बस उस ने वकालत की हुई है

    सही है मशवरा पर आप रखिए
    कलाई आपने काटी हुई है

    बदलना तो मुझे बस वक़्त को है
    घड़ी तो ठीक से पहनी हुई है

    न बंजर देखी जाती है न ज़रख़ेज़
    ये जो हम ने ज़मीं छोड़ी हुई है

    मिटेंगी दूरियाँ कैसे कि हम ने
    ग़लत-फ़हमी भी तो पाली हुई है

    वो जो भी राय है नाकाम की इक
    वही हम ने नहीं मानी हुई है

    बस इक सूरत है ले दे के मेरे पास
    ये भी माँ ने मुझे बख़्शी हुई है
    Read Full
    Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
    2 Likes
    इक मुक़द्दर छीनने वाले का जल्वा देखता
    मैं हवा से जेब तक जाता वो सिक्का देखता

    ज़िन्दगी तू नक़्ल की मोहलत अगर देती मुझे
    मैं कसौटी पे तेरी धोखे का पर्चा देखता

    कुछ दिनों तक कोई पागल बैठता था दार पे
    जो हज़ारों मर्तबा सुनसान रस्ता देखता

    मैं उसे हर बार मेहमाँ बोलता था और वो
    मेज़बानी देखता था और कमरा देखता

    आसमाँ पे चाँद उस शब आ गया था बा'द में
    यार तू वो आख़िरी बादल तो छँटता देखता
    Read Full
    Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
    1 Like
    जानता हूँ तेरी अब तलब कुछ नहीं
    मैं तेरा ख़्वाब था लेकिन अब कुछ नहीं

    जब ये बादल न थे यूँँ समझता था मैं
    बस सितारे ही हैं और शब कुछ नहीं

    आप ही मुझ को रस्ते पे लाए थे और
    आप ही कह गए आगे अब कुछ नहीं

    वो अगर पूछ ले क्या हुआ है मुझे
    बोल देना उसे आप सब कुछ नहीं

    कुछ नया इस
    में 'रजनीश' क्या है बता
    जब परेशाँ है तू और सबब कुछ नहीं
    Read Full
    Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
    2 Likes
    मैं ने उस को लौ दिखाई और फिर
    वो चराग़ों को बुझा के आ गया
    Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
    3 Likes
    लड़ तो लूँगा अँधेरे से मैं पर
    रौशनी आँख पे ही पड़ी है
    Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
    3 Likes
    चल तेरे बस में नहीं तू याद आना छोड़ दे
    वैसे तेरे हक़ में होगा गर रुलाना छोड़ दे

    बात अबकी बार मेरे रूठने की थी मगर
    तुझ सेे ये किस ने कहा मुझ को मनाना छोड़ दे

    पास बैठो हाल पूछो और फिर साया करो
    आदमी जब छोटी-मोटी चोट खाना छोड़ दे

    मैं ने ही ग़मख़्वार से जब कोई दुख बाँटा नहीं
    फिर भला क्यूँँ वो भी मेरा दिल दुखाना छोड़ दे

    सौंप दी है मुझ को जब तू ने मेरी ये ज़िन्दगी
    मेरी भी अब इल्तिजा है हक़ जताना छोड़ दे

    फिर तेरे उस दोस्त ने इक और को धोखा दिया
    कम से कम 'रजनीश' अब तो सर उठाना छोड़ दे
    Read Full
    Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
    1 Like
    जब से उस ने बोल दिया मैं सहरा हूँ
    बाज़ू सौंप के घुटने टेक के बैठा हूँ

    मेरे यार के सर जंगल का साया है
    और मैं एक लकड़हारे का बेटा हूँ

    तेरे प्यार में यूँँ कटते हैं दिन और रात
    रस्सी छोड़ के इक तलवार पे चलता हूँ

    दीवाने तो लौट गए क़िस्से देकर
    मुझ को तो जीना होगा मैं लिखता हूँ

    तुम इक दिन चुपके से दाख़िल हो जाना
    मैं इक दर हूँ और धी
    में से खुलता हूँ
    Read Full
    Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
    2 Likes
    थी यक़ीनन जग हँसाई हारने पर
    ये नहीं सोचा था पहले हम हँसेंगे
    Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
    2 Likes
    हम सेफ़र के गुनाह भी अच्छे
    पाँव रस्तों में ही छिले होंगे
    Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
    4 Likes
    आसमाँ पे चाँद उस शब आ गया था बा'द में
    यार तू वो आख़िरी बादल तो छटता देखता
    Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
    6 Likes

Top 10 of Similar Writers