Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'

Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'

@rajnishwar

Rajnishwar Chauhan 'Rajnish' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Rajnishwar Chauhan 'Rajnish''s shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
अब आ कर क्या ही शाइ'र से सुनोगे
तब आते जब वो याद आया हुआ था
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
एक अँधेरे घर में हैं हम
जिस का दरीचा कुछ छोटा है
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
न बंजर देखी जाती है न ज़रख़ेज़
ये जो हम ने ज़मीं छोड़ी हुई है
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
ख़्वाब ही ने जगाए रक्खा है
वर्ना आदम तो सो चुका होता
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
रात कैसे सोने दे सकती है फिर
चाँद को गर दिन-दहाड़े देख लो
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
आप ही मुझ को रस्ते पे लाए थे और
आप ही कह गए आगे अब कुछ नहीं
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
तभी तो अब के मेरी चाल में रवानी थी
कि मैं ने पहले भी रस्ते की ख़ाक छानी थी

मुझे तो तैरना था डूबना नहीं था ख़ैर
ये बात तब की है जब मछली जल की रानी थी
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Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
हम ने सहरा के सफ़र को तय किया है साथ में
आगे अब जंगल है मेरे साए रुक जा दो घड़ी
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
तुम्हें मुझ से बिछड़ कर क्या मिला है ख़ुद ही देखो ना
तुम अब भी पहले से ना-ख़ुश हो और मुझ से जुदा भी हो
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
क्या मोहब्बत में ये सही था यार
जी से मैं जी-हुज़ूरी पे आया
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
खिलौना आप का है जैसे खेलो
बस इतना सोचना प्यारा बना है
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
सितम ये है मुझ को न सुनने से पहले
तुम्हीं बोलते थे बता दो बता दो
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
मैं ने उस को लौ दिखाई और फिर
वो चराग़ों को बुझा के आ गया
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
चला आता मैं चौखट पे तेरी शायद कभी लेकिन
तुझे तेरे मकाँ का रास्ता पक्का नहीं करना
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
लड़ तो लूँगा अँधेरे से मैं पर
रौशनी आँख पे ही पड़ी है
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
एक वजह ये भी है ख़ुदस ज़्यादा तुझ को लिखने की
तेरी हिमायत करते हुए मैं मेरे जैसा होता हूँ
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
एक वो रात थी जब मैं तन्हा मक़्तल मक़्तल घूमा था
एक ये रात कि मैं इक चारा-गर से मिलने आया हूँ
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
तुम को पता है क्या होता था रात के होने से पहले
शाम की धूप के टुकड़े मेरी आँखों में चुभ जाते थे
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
मेरे यार के सर जंगल का साया है
और मैं एक लकड़हारे का बेटा हूँ
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
थी यक़ीनन जग हँसाई हारने पर
ये नहीं सोचा था पहले हम हँसेंगे
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'

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