काश ऐसा संयोग हो जाए
    दूर सारे वियोग हो जाए

    प्यार में हूँ, मरीज़ बन बैठा
    आप को भी ये रोग हो जाए
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    Sandeep Gandhi Nehal
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    दिखनें में है, सीधी लड़की
    लेकिन है वो, ज़िद्दी लड़की

    मुझ को हरदम, तड़पाती है
    अपनी माँ की बिगड़ी लड़की

    उस पर लिखता ग़ज़लें प्यारी
    सब कुछ है वो पगली लड़की

    हम को छोड़ा घर की ख़ातिर
    या'नी है वो, असली लड़की

    वा'दा था इक संग जीने का
    'मज़बूरी' में, बदली लड़की
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    Sandeep Gandhi Nehal
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    ये घर का बोझ कितना है
    समझ आया उठाने पर
    Sandeep Gandhi Nehal
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    मेरे हिस्से ही तो ग़म हो रहा है
    यूँ बे - ईमान मौसम हो रहा है

    यहाँ हम मौत के दर पर खड़े हैं
    वहाँ डोली का आलम हो रहा है

    उधर रस्में निभाई जा रही हैं
    इधर मेरा ही मातम हो रहा है

    मेरी सुन रूह तू आज़ाद हो जा
    किसी दूजे का जानम हो रहा है

    हमारी आज, बिछड़न की घड़ी है
    तुम्हारा आज संगम हो रहा है
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    Sandeep Gandhi Nehal
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    हूँ अंदर से टूटा मैं इतना ज़ियादा
    दिखावे कि बस ये हँसी रह गई है
    Sandeep Gandhi Nehal
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    हार के ख़ुद से काम ये करना पड़ता है
    कौन मरता है यार मरना पड़ता है
    Sandeep Gandhi Nehal
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    जो इस दुनिया से डरते हैं
    ख़ाक मोहब्बत करते हैं
    Sandeep Gandhi Nehal
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    इधर की उधर की बताती बहुत है
    हमीं से मोहब्बत छुपाती बहुत है
    Sandeep Gandhi Nehal
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    हुस्न का जो ग़ुरूर होता है
    ख़ाक इक दिन ज़रूर होता है
    Sandeep Gandhi Nehal
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    शा'इरी में बयाँ करूँगा सब
    इश्क़ खुल के जता न पाऊँगा
    Sandeep Gandhi Nehal
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