Sandeep Gandhi Nehal

Sandeep Gandhi Nehal

@sandeepga33993

Sandeep Gandhi Nehal shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Sandeep Gandhi Nehal's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
मेरे ख़्वाब मेरी ख़ुशी का हुआ क्या
लबों की मेरी इन हँसी का हुआ क्या

बड़ी ख़ूब-सूरत थी ये ज़िंदगी तो
पता ना चला ज़िंदगी का हुआ क्या
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Sandeep Gandhi Nehal
कमी से तुम्हारी करें ख़ुद-कुशी गर
तो हर रोज़ फाँसी लटकते रहेंगे
Sandeep Gandhi Nehal
लडूंगा सभी से तुम्हारे लिए मैं!
ज़मानें से, मेरी हिफा़ज़त करोगे?
Sandeep Gandhi Nehal
इक हसीं सा गुनाह करते हैं
साथ आओ निबाह करते हैं

अस्ल में तो है ही नहीं मुमकिन
ख़्वाब में ही, विवाह करते हैं
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Sandeep Gandhi Nehal
काश ऐसा संयोग हो जाए
दूर सारे वियोग हो जाए

प्यार में हूँ, मरीज़ बन बैठा
आप को भी ये रोग हो जाए
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Sandeep Gandhi Nehal
जो इस दुनिया से डरतें हैं
ख़ाक, मोहब्बत करते हैं

हम को देखो हम से सीखो
हम तो तुम पर ही मरतें हैं
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Sandeep Gandhi Nehal
जितनी ज़्यादा चाहत होगी
उतनी ज़्यादा राहत होगी

ऐसे मुझ से बिछड़ोगे तो
"अंतर्रात्मा" आहत होगी
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Sandeep Gandhi Nehal
मुहब्बत गर नदी है तो किनारे हैं जी हम दोनों
बनो हिम्मत इक दूजे के सहारे हैं जी हम दोनों
Sandeep Gandhi Nehal
ये घर का बोझ कितना है
समझ आया उठाने पर
Sandeep Gandhi Nehal
यूँ "उर्दू" की मिठास उतरे की
सब कि मीठी ज़बान हो जाए
Sandeep Gandhi Nehal
हूँ अंदर से टूटा मैं इतना ज़ियादा
दिखावे कि बस ये हँसी रह गई है
Sandeep Gandhi Nehal
हार के ख़ुद से काम ये करना पड़ता है
कौन मरता है यार मरना पड़ता है
Sandeep Gandhi Nehal
जो इस दुनिया से डरते हैं
ख़ाक मोहब्बत करते हैं
Sandeep Gandhi Nehal
जिस्म थकता कभी नहीं यारों
बस दिमाग़ी थकान होती है
Sandeep Gandhi Nehal
अगर चाहते हो बहुत दूर चलना
ज़ेहन से गुमानी हटानी पड़ेगी
Sandeep Gandhi Nehal
इधर की उधर की बताती बहुत है
हमीं से मोहब्बत छुपाती बहुत है
Sandeep Gandhi Nehal
जो सही नईं हुज़ूर करते हो
आप कितना ग़ुरूर करते हो
Sandeep Gandhi Nehal
बंधनों से रिहाई मत करना
यूँ कभी भी जुदाई मत करना

लाख दुनिया कहे बुरा मुझ को
आप मेरी बुराई मत करना
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Sandeep Gandhi Nehal
हुस्न का जो ग़ुरूर होता है
ख़ाक इक दिन ज़रूर होता है
Sandeep Gandhi Nehal
ख़्वाहिशें कांच की बनी हैं ना
कांच आख़िर में चूर होता है
Sandeep Gandhi Nehal

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