मेरे नाम का अंतिम अक्षर तेरे नाम का पहला है
    ख़त्म हुआ मैं जहाँ वहीं पर तू ने आ कर थाम लिया
    Sanskar Shrivastav
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    इक कच्चे धागे में सिमटा होता है
    दुनिया भर में सब सेे पक्का वो रिश्ता
    Sanskar Shrivastav
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    लौट कर आएगा फिर ज़माना वही
    कृष्ण फिर आएँगे राधिका के लिए
    Sanskar Shrivastav
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    तेरा मेरा मिलना रब ने लिक्खा था
    वरना कैसे पहला मैसेज करता मैं
    Sanskar Shrivastav
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    कर के थोड़ी हिम्मत लिखना चाहता हूँ
    नेताओं को लानत लिखना चाहता हूँ

    जिस को पढ़कर सारे तुझ सेे प्यार करें
    तेरी ऐसी सीरत लिखना चाहता हूँ
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    Sanskar Shrivastav
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    जब रातों को तू सपने में आती है
    अगले दिन मैं सूरज से लड़ जाता हूँ
    Sanskar Shrivastav
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    प्यार करूँँगा मैं उस को मरते दम तक
    मैं ने मीरा जी की चाहत देखी है
    Sanskar Shrivastav
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    अपनी माँ को अपनी माँ की ख़ातिर रोता देखा है
    मैं भी अपनी माँ की ख़ातिर थोड़ा रोना चाहता हूँ
    Sanskar Shrivastav
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    तुलसी माँ सी पावन है वो निष्छल माँ सीता जैसी
    इक लड़की ने जीवन मेरा स्वर्ग बना कर रक्खा है
    Sanskar Shrivastav
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    मैं ने उस को अपना समझा लेकिन वो तो तेरा था
    अब बस इतना करना उस को सारी ख़ुशियाँ दे देना
    Sanskar Shrivastav
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