मुझे ख़बर नहीं ग़म क्या है और ख़ुशी क्या है
    ये ज़िंदगी की है सूरत तो ज़िंदगी क्या है
    Shadan Ahsan Marehrvi
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    हैं लहू से कई गुना बढ़कर
    वो जो एहसास के मरासिम हैं
    Shadan Ahsan Marehrvi
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    रंग दिल पर वही है चाहत का
    इश्क़ दोनों तरफ़ बराबर है

    देख तेरे फ़िराक़ में जानाँ
    किस तरह कट रहा दिसम्बर है
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    Shadan Ahsan Marehrvi
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    सींचते ख़ून से रहे मक़्तल
    तपते सेहरा में वो ख़ुदा वाले

    इन निगाहों में बेश्तर मेरी
    क़ैद मंज़र हैं करबला वाले
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    Shadan Ahsan Marehrvi
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    ज़बाने दाग़ में मैं ने उसे लिखी चिट्ठी
    मिज़ाजे मीर में उस ने मुझे जवाब दिया
    Shadan Ahsan Marehrvi
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    ये जो उल्फ़त है इक क़यामत है
    और बंदा है तू ख़ुदा वाला
    Shadan Ahsan Marehrvi
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    जो भी कहने को मीर कहते हैं
    बात उतनी वज़ीर कहते हैं

    मुत्तक़ी कर के दीन का सौदा
    ख़ुद को अहले ज़मीर कहते हैं

    बादशाहों से कम नहीं रुतबा
    आप ख़ुद को फ़क़ीर कहते हैं

    लोग आ कर फ़रेब की ज़द में
    बुत-परस्तों को पीर कहते हैं

    इश्क़ हो आरज़ी तो मत करना
    बात इतनी कबीर कहते हैं

    इश्क़ की डोर से यूँँ बाँधा है
    लोग मुझ को असीर कहते हैं

    एक मिसरा तो कह के दिखलाओ
    जिस तरह शे'र मीर कहते हैं

    पीर मेरा अली है लासानी
    पीर भी जिस को मीर कहते हैं
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    Shadan Ahsan Marehrvi
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    इक कसक दिल में कहीं उठती है
    बे-सबब शे'र नहीं होता है
    Shadan Ahsan Marehrvi
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    वादा-ए-वस्ल मुझ से टूट गया
    मैं ने छोड़ी न आम की दावत
    Shadan Ahsan Marehrvi
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    शौक़े आज़ादी-ए-हवस में कटी
    उम्र जितनी मेरी क़फ़स में कटी
    Shadan Ahsan Marehrvi
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