Shan Sharma

Top 10 of Shan Sharma

    अगर होने लगे ख़्वाहिश नज़र दैर-ओ-हरम में
    लुबां मंतर लिए फिरते ये साहिर क्या करेंगे
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    सब्र का फल रहा न शीरीं अब
    देर की तो न गाड़ियाँ ठहरी
    Shan Sharma
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    चार-सू जब चारा-गर हैं घाव क्यूँ जाता नहीं
    क्या सितम है दर्द मेरा चैन क्यूँ पाता नहीं

    एक रूठी सी हँसी है होंठ पे ठहरी मिरे
    एक आँसू ख़ुशनुमा है आँख से जाता नहीं

    शक़्ल तेरी भी ज़रा बदली हुई सी लग रही
    मिल रहा हूँ मैं भी यूँँ जैसे कोई नाता नहीं

    आज बादल के सहारे उस ने ख़त भेजा हमें
    आसमाँ क़ासिद है कैसा लफ़्ज़ बरसाता नहीं

    चार घंटे तीस मिनटों में मिलो उस ने कहा
    बदनसीबी के घड़ी का चल रहा काँटा नहीं

    मेरा हाफ़िज़ मेरा मुर्शिद ' शान ' तू है बन गया
    इश्क़ सजदे से जुदा मुझ को नज़र आता नहीं
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    Shan Sharma
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    आज बादल के सहारे उस ने ख़त भेजा हमें
    आसमाँ क़ासिद है कैसा लफ़्ज़ बरसाता नहीं
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    तुम्हें ये चाँद दिलबर सा लगे है
    मुझे दिलबर का झुमका लग रहा है
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    बनाया दरमियाँ रिश्ता ख़ुदा ने
    हमारी तल्ख़ियों ने मार डाला
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    गिन रहे हो आजकल तारों को जिस की याद में
    वो नहीं आएगा तुम उँगली जलाना छोड़ दो
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    किया था इश्क़ तू ने यार सब सेे
    वफ़ा को गिनतियों ने मार डाला
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    खिली मुस्कान सी आज़ाद औरत
    जिसे पाबंदियों ने मार डाला
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    हमारा नाम जोड़ा जा रहा है
    मुझे ये काम उम्दा लग रहा है
    Shan Sharma
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