Vishal Bagh

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    दानिशमंदों रस्ता बतला सकते हो
    दीवाना हूँ वीराने तक जाना है

    जन्नत वाले थोड़ा पहले उतरेंगे
    रिन्दों को तो मयख़ाने तक जाना है
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    शाम ढले मैं घर रौशन भी करता था
    कितना कुछ तो मैं बेमन भी करता था

    दुनिया मुझ सेे सिर्फ़ मोहब्बत करती है
    वो दीवाना पागलपन भी करता था

    तुम जो कहते थे ना इक दिन छू लोगे
    छू लेते ना मेरा मन भी करता था

    मेरे सिरहाने वो घुँघरू गुम-सुम है
    उस के पैरों में छनछन भी करता था

    उस के हाथों में बस हम ही जँचते थे
    दावा सोने का कंगन भी करता था
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    उम्र गुज़री है माँजते ख़ुद को
    साफ़ हैं पर चमक नहीं पाए

    डाल ने फूल की तरह पाला
    ख़ार थे ना महक नहीं पाए
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    तुम ने जब से अपनी पलकों पर रक्खा
    कालिख़ को सब काजल काजल कहते हैं
    इश्क़ में पागल ही तो होना होता है
    पागल हैं जो मुझ को पागल कहते हैं
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    मिट्टी और पानी भी हमें नाप कर मिलते हैं
    तुम गमले में पालने को आसान समझते हो
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    बा-हुनर हो के कुछ न कर पाना
    रेज़ा-रेज़ा बिखर के ढह जाना

    मुझ को बेहद उदास करता है
    ख़ास लोगों का आम रह जाना
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    साफ़ दिखता है तेरे चेहरे पे
    इश्क़ डाले है डेरे चेहरे पे

    इतनी शिद्दत से देखिए मुझ को
    नील पड़ जाएँ मेरे चेहरे पे

    इतनी आँखें नहीं है दुनिया में
    जितने चेहरे हैं तेरे चेहरे पे

    सोलहवाँ साल लग गया जैसे
    उस ने जब हाथ फेरे चेहरे पे

    हम तुझे देख ही नहीं पाए
    इतनी नज़रें थी तेरे चेहरे पे
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    जब वो बोले कि कोई प्यारा था
    उन का मेरी तरफ़ इशारा था

    हम निकल आए जिस्म से बाहर
    उस ने कुछ इस तरह पुकारा था

    फेर देता था वो नज़र अपनी
    हर नज़र का यही उतारा था

    डूब जाना ही ठीक था मेरा
    मेरे दोनों तरफ़ किनारा था

    आख़िरश बोझ हो गया देखो
    मुझ को जो जिस्म जाँ से प्यारा था
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    तुम ने जब से अपनी पलकों पर रक्खा
    कालिख़ को सब काजल काजल कहते हैं
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    तुम जो कहते थे ना इक दिन छू लोगे
    छू लेते ना मेरा मन भी करता था
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