दर्द में जान जा रही होगी
    आँसुओं में नहा रही होगी

    हो के मजबूर इस ज़माने से
    वो मेरे ख़त जला रही होगी
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    Yogendra Singh Raghuwanshi
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    उन की आँखें में बेईमानी है
    उन के लहज़े में बद-गुमानी है

    अब मोहब्बत कहाँ है रिश्ते में
    उन की बातों में मेहरबानी है
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    Yogendra Singh Raghuwanshi
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    होंठों पर इक बात छुपाकर रक्खी है
    प्रिया नेह बरसात छुपाकर रक्खी है

    जिस रैना में स्वप्न मिलन के देखे थे
    वो काजल सी रात छुपाकर रक्खी है
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    Yogendra Singh Raghuwanshi
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    साथ तेरे और चल सकता नहीं
    राख हूँ अब और जल सकता नहीं

    आँधियाँ आएँ कि अब तूफ़ाँ चलें
    राह अपनी मैं बदल सकता नहीं

    थक गया हूँ बे-सबब चलते हुए
    इश्क़ में अब और चल सकता नहीं

    जिस्म की बेताबियों से मात खा
    रूह को अब और छल सकता नहीं

    छोड़ दूँगा ये जहाँ तेरे लिए
    अब तुझे मैं और खल सकता नहीं

    कब तलक पानी से मैं डरता रहूँ
    बर्फ़ हूँ पर और गल सकता नहीं

    रात से मैं दोस्ती कैसे करूँँ
    सूर्य हूँ अब और ढल सकता नहीं
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    Yogendra Singh Raghuwanshi
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    तेरे हाथों में कंगन बना झूम लूँ
    तेरी नज़रों में सारा जहाँ घूम लूँ

    प्रेम में तेरे अधरों को क्या चूमना
    तेरे मेहँदी लगे कर कमल चूम लूँ
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    Yogendra Singh Raghuwanshi
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    मैं और बस मेरी तन्हाई हम दोनों
    प्यार मोहब्बत और जुदाई हम दोनों
    Yogendra Singh Raghuwanshi
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    छू के उन के बदन को बूँदों से
    आज बारिश ने मयकशी कर ली
    Yogendra Singh Raghuwanshi
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    तुझ सेे रिश्ता क़ायम रखने को जानाँ
    जाने कितनी बार गिराया है ख़ुद को
    Yogendra Singh Raghuwanshi
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    है नहीं मंज़ूर जीना बिन तुम्हारे
    मैं तुम्हारे साथ जीना चाहता हूँ

    तोड़ कर सारी रिवाजें सारी रस्में
    मैं तुम्हारे पाँव छूना चाहता हूँ
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    Yogendra Singh Raghuwanshi
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    आजकल नींद ही नहीं खुलती
    तुम ने पायल उतार दी है क्या
    Yogendra Singh Raghuwanshi
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