Zafar Iqbal

Top 10 of Zafar Iqbal

    मुझे ख़राब किया उस ने हाँ किया होगा
    उसी से पूछिए मुझ को ख़बर ज़ियादा नहीं
    Zafar Iqbal
    53 Likes
    वो क़हर था कि रात का पत्थर पिघल पड़ा
    क्या आतिशीं गुलाब खिला आसमान पर
    Zafar Iqbal
    37 Likes
    सफ़र पीछे की जानिब है क़दम आगे है मेरा
    मैं बूढ़ा होता जाता हूँ जवाँ होने की ख़ातिर
    Zafar Iqbal
    27 Likes
    मौत के साथ हुई है मिरी शादी सो 'ज़फ़र'
    उम्र के आख़िरी लम्हात में दूल्हा हुआ मैं
    Zafar Iqbal
    28 Likes
    तुझ को मेरी न मुझे तेरी ख़बर जाएगी
    ईद अब के भी दबे पाँव गुज़र जाएगी
    Zafar Iqbal
    37 Likes
    ख़ुदा को मान कि तुझ लब के चूमने के सिवा
    कोई इलाज नहीं आज की उदासी का
    Zafar Iqbal
    55 Likes
    अब के इस बज़्म में कुछ अपना पता भी देना
    पाँव पर पाँव जो रखना तो दबा भी देना
    Zafar Iqbal
    23 Likes
    जो यहाँ ख़ुद ही लगा रक्खी है चारों जानिब
    एक दिन हम ने इसी आग में जल जाना है
    Zafar Iqbal
    22 Likes
    थकना भी लाज़मी था कुछ काम करते करते
    कुछ और थक गया हूँ आराम करते करते

    अंदर सब आ गया है बाहर का भी अँधेरा
    ख़ुद रात हो गया हूँ मैं शाम करते करते

    ये उम्र थी ही ऐसी जैसी गुज़ार दी है
    बदनाम होते होते बदनाम करते करते

    फँसता नहीं परिंदा है भी इसी फ़ज़ा में
    तंग आ गया हूँ दिल को यूँँ दाम करते करते

    कुछ बे-ख़बर नहीं थे जो जानते हैं मुझ को
    मैं कूच कर रहा था बिसराम करते करते

    सर से गुज़र गया है पानी तो ज़ोर करता
    सब रोक रुकते रुकते सब थाम करते करते

    किस के तवाफ़ में थे और ये दिन आ गए हैं
    क्या ख़ाक थी कि जिस को एहराम करते करते

    जिस मोड़ से चले थे पहुँचे हैं फिर वहीं पर
    इक राएगाँ सफ़र को अंजाम करते करते

    आख़िर 'ज़फ़र' हुआ हूँ मंज़र से ख़ुद ही ग़ाएब
    उस्लूब-ए-ख़ास अपना मैं आम करते करते
    Read Full
    Zafar Iqbal
    6 Likes
    थकना भी लाज़मी था कुछ काम करते करते
    कुछ और थक गया हूँ आराम करते करते
    Zafar Iqbal
    26 Likes

Top 10 of Similar Writers