Prashant Arahat

Prashant Arahat

@Arahat_Prashant

Prashant Arahat shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Prashant Arahat's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
अगर शिकवा करे आ कर कभी हम से मुहब्बत में
रहें बेफ़िक्र हम उस सेे हमें फिर क्या परेशानी
Prashant Arahat
नहीं कोई अगर तो हम मिलेंगे
ज़रूरत में तुम्हें हरदम मिलेंगे

मिलेंगे सैकड़ों ही लोग लेकिन
मगर मेरी तरह के कम मिलेंगे
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Prashant Arahat
मेरी ख़ामोशियाँ भी बोलती हैं
मेरे होंठों पे अपने होंठ रख दो
Prashant Arahat
उस ने मेरी आँखों पर चुपके से आ कर हाथ रखे
इक चुम्बन होंठों पर ले कर यूँँ सारे जज़्बात रखे

देख तुम्हें बस मेरे मन से एक दुआ ये उठती है
मालिक इस जीवन भर मुझ को यार तुम्हारे साथ रखे
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Prashant Arahat
अचानक से कहीं महफ़िल में तुम सेे रूबरू होना
वहाँ मुमकिन नहीं तुम सेे कोई भी गुफ़्तुगू होना
Prashant Arahat
सितम ये है हमें वो आज आवारा समझते हैं
जिन्हें हम आज भी सच में बहुत प्यारा समझते हैं

हमारे दिल के सागर में कभी तुम डूबकर देखो
इसे तो बे–वजह ही लोग बस ख़ारा समझते हैं
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Prashant Arahat
पिता बचपन में मिट्टी के खिलौने ला के देते थे
उन्हें मालूम था आगे सबक़ ये काम आएगा
Prashant Arahat
छोड़ गई है मुझ को तो इस की कोई परवाह नहीं
उस सेे अच्छी लड़की से अब इश्क़ हमारा चलता है
Prashant Arahat
लड़की एक मिली है मुझ को देख जिसे सब लोग कहें
जिस के पीछे तुम पागल थे उस सेे दुगुनी अच्छी है
Prashant Arahat
चॉकलेट खाकर समझ आया मुझे ये देर में
स्वाद अच्छा है तिरे होंठों से अच्छा कुछ नहीं
Prashant Arahat
विसाले यार होती है यहाँ हर रोज़ ख़्वाबों में
तभी मिलने की अब तुम सेे कोई ख़्वाहिश नहीं होती
Prashant Arahat
चलो अब चाय पीते हैं कहीं पर
तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Prashant Arahat
रास्ते सब के सभी उस ओर ही जा कर मिले हैं
ज़िंदगी ये जिस तरफ़ ले कर के जाना चाहती है
Prashant Arahat
कोई शोहरत के पीछे भागता है
कोई दौलत के पीछे भागता है

जिसे ये इश्क़ भी हासिल नहीं है
वो बस चाहत के पीछे भागता है
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Prashant Arahat
कहाँ जा कर रहेगा ये नहीं मालूम है हम को
ठिकाना सिर्फ़ मजनूँ का वही वर्षों से सहरा है
Prashant Arahat
बाक़ी सब सेे मिलना जुलना बातें करना एक तरफ़
उस की प्यारी बातें सुनना सुंदर लहजा एक तरफ़

खिलते गुलशन सारी ख़ुशबू अच्छे हैं माना लेकिन
नीली साड़ी उस का चेहरा हाथ में चश्मा एक तरफ़
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Prashant Arahat
ज़माना ढूँढ़ता रहता है भौतिक साधनों में ही
मगर मुझ को बताओ ये ख़ुशी अंदर छुपाई क्यूँ
Prashant Arahat
बुरा कोई नहीं होता कोई अच्छा नहीं होता
बुराई सिर्फ़ मुझ
में ही तुम्हें देती दिखाई क्यूँ
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Prashant Arahat
सलीक़ा ही नहीं तुम को कोई रिश्ता निभाने का
जो जाना हो चले जाओ मगर ये बे-वफ़ाई क्यूँ
Prashant Arahat
मैं समझा ही नहीं कुछ भी कि ऐसा क्या हुआ है
किनारा कर लिया तुम ने चलो अच्छा हुआ है

बहुत पहले से ही मैं देख कर ये सोचता था
न जाने क्या हुआ लहजा ये क्यूँ बदला हुआ है
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Prashant Arahat

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