Armaan khan

Armaan khan

@Armaank

Armaan khan shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Armaan khan's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
बाहर अक्सर शोर-शराबा रहता है
अंदर इक ख़ामोशी पलती रहती है

हम से इक अंदाज़ नहीं बदला जाता
दुनिया कैसे रंग बदलती रहती है
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Armaan khan
चलते रहना थकान जाएगी
और क्या होगा जान जाएगी

मैं यही सोच कर अकेला हूँ
वो किसी रोज़ मान जाएगी
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Armaan khan
सोचा नहीं कि क्यूँ मुझे नाकामियाँ मिलीं
जब अपने ही वजूद में सौ ख़ामियाँ मिलीं

तन्हाइयों से तंग था मैं पिछले कुछ दिनों
फिर एक दिन मुझे मेरी परछाइयाँ मिलीं
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Armaan khan
कुछ ख़्वाब कभी पूरे नहीं होने यहाँ पर
बोझिल हैं अगर पलकें तो सामान उतारो

तुम जैसों को चाहा था कभी मैं ने ग़ज़ब है
आ कर के किसी रोज़ ये एहसान उतारो
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Armaan khan
मैं इक ख़याल की दुनिया का शाहज़ादा हूँ
मेरे ख़याल की क्यारी का फूल थी तुम भी

मैं एक बार मोहब्बत में फिर शिकस्ता रहा
सो बेबसी में ये कहता हूँ भूल थी तुम भी
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Armaan khan
ये फ़ासला ज़रूर है मगर ये फ़ैसला नहीं
सो बेबसी में कह रहा हूँ मैं कोई गिला नहीं

मैं देर रात कमरे में ये सोच कर के आया हूँ
अब इस के बा'द और कोई रास्ता बचा नहीं
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Armaan khan
यार सिगरेट जलाओ के बहुत दर्द है आज
सर्द सी रात है बारिश है हवा चल रही है

कोई पूछे कि ये सब क्या है तो कह देना उसे
बच तो निकले हैं मोहब्बत से दवा चल रही है
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Armaan khan
तुम्हारा ज़िक्र चला है हमारे घर में फिर
हम एक कोने में बैठे हैं मुस्कुरा रहे हैं
Armaan khan
गाँव में छोड़ के आया था मोहब्बत अपनी
शहर में जिस्म था और गाँव में अटका दिल था

उस की शादी बड़े लोगों में लगी और मैं गरीब
शहर से भाग के जाता भी तो क्या हासिल था
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Armaan khan
तन्ज़िया फ़िक्र का मैं ने भी दिया उस को जवाब
वो है नादान समझता है कि बच्चा हूँ मैं

उस ने हँसते हुए पूछा था कि कैसे हो तुम
मैं ने भी हँसते हुए कह दिया अच्छा हूँ मैं
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Armaan khan
भंवर में गोते लगा रहे हो बताओ साहिल कहाँ है प्यारे
थकान क़दमों से पूछती है तुम्हारी मंज़िल कहाँ है प्यारे

मैं बेबसी के अब उस मुहाने पे आ खड़ा हूँ कि कोई कह दे
कि जिस को शिद्दत से चाहते हो तुम्हारे क़ाबिल कहाँ है प्यारे
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Armaan khan
तेरी क़िस्मत कहाँ-कहाँ, और मैं
एक वीरान सा मकाँ और मैं

दूर तक आ रहा नज़र कुछ तो
एक सिगरेट का धुआँ और मैं
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Armaan khan
उस ने ज़बाँ से कह तो दिया अलविदा मगर
बस एक बार आँख भी कह दे तो और बात
Armaan khan
हाँ यही मेरी ख़ुद-शनासी है
जिस्म ताज़ा है रूह बासी है

सब हँसी को हँसी समझते हैं
तुम तो समझो हँसी उदासी है
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Armaan khan
हमारी अपनी मर्ज़ी है हमारी अपनी दुनिया है
तुम्हारे रंग में ढल जाऊँगा सोचा ही क्यूँ तुम ने
Armaan khan
आपसे राबता था पहले कोई
ओह, हाँ, याद आया, कैसे हो
Armaan khan
हर एक चीज़ वहीं है जहाँ पे छोड़ी थी
बस एक घर ही नहीं आ रहा नज़र घर में
Armaan khan
भटकती रूहों का बोझ कब तक कोई उठाता
कहीं ठहरता,पनाह लेता, तो साथ होता

मैं जिस 'अक़ीदत के साथ उस को भुला रहा हूँ
उसी 'अक़ीदत से चाह लेता, तो साथ होता
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Armaan khan
ऐ दिल-ए-हक़ शनास दुनिया है
न लगा इस सेे आस, दुनिया है

रूह को है तेरी ख़ुदा की तलब
और तेरे आस पास दुनिया है
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Armaan khan
सवाल इस का नहीं है कि क्यूँ उदास हूँ मैं
अज़ाब ये है कि घर जा के मुस्कुराना है
Armaan khan

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