Festive Shayari Collection - Joyful lines filled with celebration, jashn, and festive vibes

Festive shayari captures the spirit of joy, togetherness, and celebration that comes with every tyohar. Whether it’s lights, laughter, or heartfelt wishes, these lines bring warmth to every occasion. Perfect for sharing jashn vibes with loved ones, festive poetry turns moments into memories.

jashn shayari
कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी
दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी
Parveen Shakir
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utsav shayari
इक और किताब ख़त्म की फिर उस को फाड़ कर
काग़ज़ का इक जहाज़ बनाया ख़ुशी हुई
Ameer Imam
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khushi shayari
तिरे वादे पर जिए हम तो ये जान झूट जाना
कि ख़ुशी से मर न जाते अगर ए'तिबार होता
Mirza Ghalib
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tyohar shayari
ये ज़िंदगी भी अजब कारोबार है कि मुझे
ख़ुशी है पाने की कोई न रंज खोने का
Javed Akhtar
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celebration shayari
मुझे ख़बर नहीं ग़म क्या है और ख़ुशी क्या है
ये ज़िंदगी की है सूरत तो ज़िंदगी क्या है
Ahsan Marahravi
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ये तुम ने कैसा बना कर हमें किया है गुम
ख़ुशी से झूम उठेगा जिसे मिलेंगे हम
Swapnil Tiwari
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तेरे होते हुए महफ़िल में जलाते हैं चराग़
लोग क्या सादा हैं सूरज को दिखाते हैं चराग़
Ahmad Faraz
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ये शहर वो है कि कोई ख़ुशी तो क्या देता
किसी ने दिल भी दुखाया नहीं बहुत दिन से
Farhat Ehsaas
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बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी
जैसी अब है तेरी महफ़िल कभी ऐसी तो न थी
Bahadur Shah Zafar
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मुझे अँधेरे से बात करनी है सो करा दो, दिया बुझा दो
कुछ एक लम्हों को रौशनी का गला दबा दो, दिया बुझा दो

रिवाज़-ए-महफ़िल निभा रहा हूँ बता रहा हूँ मैं जा रहा हूँ
मुझे विदा दो, जो रोना चाहे उन्हें बुला दो, दिया बुझा दो
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Vikram Gaur Vairagi
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एक महफ़िल में कई महफ़िलें होती हैं शरीक
जिस को भी पास से देखोगे अकेला होगा
Nida Fazli
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राम होने में या रावण में है अंतर इतना
एक दुनिया को ख़ुशी दूसरा ग़म देता है

हम ने रावण को बरस दर बरस जलाया है
कौन है वो जो इसे फिर से जनम देता है
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Kumar Vishwas
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तिरे सिवा भी कहीं थी पनाह भूल गए
निकल के हम तिरी महफ़िल से राह भूल गए
Majrooh Sultanpuri
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सब का ख़ुशी से फ़ासला एक क़दम है
हर घर में बस एक ही कमरा कम है
Javed Akhtar
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ये भी ए'जाज़ मुझे इश्क़ ने बख़्शा था कभी
उस की आवाज़ से मैं दीप जला सकता था
Ahmad Khayal
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ग़म और ख़ुशी में फ़र्क़ न महसूस हो जहाँ
मैं दिल को उस मक़ाम पे लाता चला गया
Sahir Ludhianvi
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चंद कलियाँ नशात की चुन कर मुद्दतों महव-ए-यास रहता हूँ
तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही तुझ से मिल कर उदास रहता हूँ
Sahir Ludhianvi
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क्या ख़ुशी में ज़िंदगी का होश कम रह जाएगा
ग़म अगर मिट भी गया एहसास-ए-ग़म रह जाएगा
Shakeel Badayuni
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दिल नज़र बन जाएगा ग़म हर ख़ुशी हो जाएगी
आप के जाते ही दुनिया दूसरी हो जाएगी
Shakeel Badayuni
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सभी के दीप सुंदर हैं हमारे क्या तुम्हारे क्या
उजाला हर तरफ़ है इस किनारे उस किनारे क्या
Hafeez Banarasi
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दुल्हन बनी हुई हैं राहें
जश्न मनाओ साल-ए-नौ के
Sahir Ludhianvi
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ऐ दिल की ख़लिश चल यूँँही सही चलता तो हूँ उन की महफ़िल में
उस वक़्त मुझे चौंका देना जब रंग पे महफ़िल आ जाए
Behzad Lakhnavi
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ख़ुशी की बात और है ग़मों की बात और
तुम्हारी बात और है हमारी बात और
Anwar Taban
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तुम हुस्न की ख़ुद इक दुनिया हो शायद ये तुम्हें मालूम नहीं
महफ़िल में तुम्हारे आने से हर चीज़ पे नूर आ जाता है
Sahir Ludhianvi
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा

हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में
अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
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Santosh S Singh
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मैं ने आबाद किए कितने ही वीराने 'हफ़ीज़'
ज़िंदगी मेरी इक उजड़ी हुई महफ़िल ही सही
Hafeez Banarasi
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ये चुपके चुपके न थमने वाली हँसी तो देखो
वो साथ है तो ज़रा हमारी ख़ुशी तो देखो
Shariq Kaifi
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तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही
तुझ से मिल कर उदास रहता हूँ
Sahir Ludhianvi
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चराग़ घर का हो महफ़िल का हो कि मंदिर का
हवा के पास कोई मसलहत नहीं होती
Waseem Barelvi
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इन्हीं ग़म की घटाओं से ख़ुशी का चाँद निकलेगा
अँधेरी रात के पर्दे में दिन की रौशनी भी है
Akhtar Shirani
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महफ़िल में तेरी यूँँ ही रहे जश्न-ए-चरागाँ
आँखों में ही ये रात गुज़र जाए तो अच्छा
Sahir Ludhianvi
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किस की होली जश्न-ए-नौ-रोज़ी है आज
सुर्ख़ मय से साक़िया दस्तार रंग
Imam Bakhsh Nasikh
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कुछ इस अदास मोहब्बत-शनास होना है
ख़ुशी के बाब में मुझ को उदास होना है
Rahul Jha
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गाहे गाहे बस अब यही हो क्या
तुम सेे मिल कर बहुत ख़ुशी हो क्या
Jaun Elia
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किसी की तपिश में ख़ुशी है किसी की
किसी की ख़लिश में मज़ा है किसी का
Unknown
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मोहब्बत करने वाले कम न होंगे
तिरी महफ़िल में लेकिन हम न होंगे
Hafeez Hoshiarpuri
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उम्र के आख़िरी मक़ाम में हम
मिल भी जाए तो क्या ख़ुशी होगी

क्या सितम तुम को देखने के लिए
हम को दुनिया भी देखनी होगी
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Vikram Sharma
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हर ख़ुशी मुस्कुरा के कहती है
दर्द बनकर छुपे हुए हो तुम

आज आब-ओ-हवा में ख़ुश्बू है
लग रहा है घुले हुए हो तुम
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Ritesh Rajwada
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जब भी माँगूँ तेरी ख़ुशी माँगूँ
और दुआएँ ख़ुदा तलक जाएँ

ख़्वाब आएँ तो नींद यूँँ महके
आँख से ख़ुशबुएँ छलक जाएँ
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Ritesh Rajwada
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शोर की इस भीड़ में ख़ामोश तन्हाई सी तुम
ज़िन्दगी है धूप तो मद-मस्त पुर्वाई सी तुम

चाहे महफ़िल में रहूँ चाहे अकेले में रहूँ
गूँजती रहती हो मुझ में शोख़ शहनाई सी तुम
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Kunwar Bechain
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उस ने महफ़िल से उठाया हम को
जिस को पलकों पे बिठाया हम ने
Vishal Bagh
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अगर लगता है वो क़ाबिल नहीं है
तो रिश्ता तोड़ना मुश्किल नहीं है

रक़ीब आया है मेरे शे'र सुनने
तो अब ये जंग है महफ़िल नहीं है
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Tanoj Dadhich
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क़ुबूल है जिन्हें ग़म भी तेरी ख़ुशी के लिए
वो जी रहे हैं हक़ीक़त में ज़िन्दगी के लिए
Nasir Kazmi
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नए दीवानों को देखें तो ख़ुशी होती है
हम भी ऐसे ही थे जब आए थे वीराने में
Ahmad Mushtaq
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फिर इस के बा'द मनाया न जश्न ख़ुश्बू का
लहू में डूबी थी फ़स्ल-ए-बहार क्या करते
Azhar Iqbal
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ये भ्रामक प्रकाश ये कल्पित दीप उत्सव
दृष्टिहीन हुए तो ये सब पाया है

मर्यादा पुरूषोत्तम तो वनवास में है
सन्यासी के भेष में रावण आया है
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Azhar Iqbal
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गुमान है या किसी विश्वास में है
सभी अच्छे दिनों की आस में है

ये कैसा जश्न है घर वापसी का
अभी तो राम ही वनवास में है
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Azhar Iqbal
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ख़ुशबू से किस ज़बान में बातें करेंगे लोग
महफ़िल में ये सवाल तुझे देख कर हुआ
Mansoor Usmani
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ये गूँगों की महफ़िल है निकलना ही पड़ेगा
क्या इतनी ख़ता कम है कि हम बोल पड़े हैं
Waseem Barelvi
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न रूई हो तो अपने अश्कों से बाती बनाएँगे
बुझा दीया हमारा तो हवा से लड़ भी जाएँगे

बनाई रोज़ चौदह साल रंगोली बस इस ख़ातिर
न जाने रामजी वनवास से कब लौट आएंँगे
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Krishnakant Kabk
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जो बुजुर्गों की दु'आओं के दीयों से रौशन
रोज़ उस घर में दीवाली का जश्न होता है
Pratap Somvanshi
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तुम इन लबों की हँसी और ख़ुशी पे मत जाना
ये रोज़ रोज़ हमें भी फ़रेब देते हैं
Shadab Asghar
मुबारक मुबारक नया साल आया
ख़ुशी का समाँ सारी दुनिया पे छाया
Akhtar Shirani
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ये कह के दिल ने मिरे हौसले बढ़ाए हैं
ग़मों की धूप के आगे ख़ुशी के साए हैं
Mahirul Qadri
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है ख़ुशी इंतिज़ार की हर दम
मैं ये क्यूँँ पूछूँ कब मिलेंगे आप
Nizam Rampuri
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दर्द की बात किसी हँसती हुई महफ़िल में
जैसे कह दे किसी तुर्बत पे लतीफ़ा कोई
Ahmad Rahi
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ख़ुशी से काँप रही थीं ये उँगलियाँ इतनी
डिलीट हो गया इक शख़्स सेव करने में
Fahmi Badayuni
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रखी थी ले के कॉपी हम ने उस की
ख़ुशी से झूम उठा बस्ता हमारा
Ankit Maurya
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दफ्न ताबूत में कर तिरी हर ख़ुशी
जश्न कैसे मनाते है मय्यत पे भी

ख़ास तारीख़ थी इम्तिहाँ की मगर
आज बारात उस की बुला ली गई
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Shilpi
ख़ुशी में भी ख़ुशी होती नहीं अब
तेरा ग़म ही सतह पर तैरता है
Umesh Maurya
तेरे आने की ख़ुशी है न है फ़ुर्क़त का ग़म
ग़म ये है बीत गए प्यार के सावन कितने
Shashank Shekhar Pathak
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ज़माना ज़ुल्म करता है ख़ुशी से
कभी तुझ को कभी मुझ को सताए
Meem Alif Shaz
फ़र्त-ए-ख़ुशी से अपनी जो भी रश्क करते हैं
उन को तिरी बनाई वो जन्नत तलब नहीं
Sabir Hussain
ज़ेहन से यादों के लश्कर जा चुके
वो मेरी महफ़िल से उठ कर जा चुके

मेरा दिल भी जैसे पाकिस्तान है
सब हुकूमत कर के बाहर जा चुके
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Tehzeeb Hafi
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दुखी रहने की आदत यूँंँ बना ली है कि अब कोई
ख़ुशी का ज़िक्र भी कर दे तो फिर तकलीफ़ होती है
Dipendra Singh 'Raaz'
महफ़िल में बैठे लोगों को भाने लगी
जब वो मेरे अश'आर फ़रमाने लगी
Rachit Sonkar
मज़ा चहिए जो आख़िर तक उदासी से मोहब्बत कर
ख़ुशी का क्या है कब तब्दील है से थी में हो जाए
Atul K Rai
समुंदर में भी सहरा देखना है
मुझे महफ़िल में तन्हा देख लेना
Aqib khan
अश्क माँ के जो ख़ुशी से गिरे तो हैं मोती
और छलके जो ग़मों से तो लहू हो जाए
S M Afzal Imam
हुनर से काम लिया पेंट ब्रश नहीं तोड़ा
बना लिया तेरे जैसा ही कोई रंगों से

मुझे ये डर है कि मिल जाएगी तो रो दूँगा
मैं जिस ख़ुशी को तरसता रहा हूँ बरसों से
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Rahul Gurjar
ख़ुशी समेट के रखना फ़िज़ूल है असलम
अजीब चीज़ है ये बाँटने से मिलती है
Javed Aslam
मिरी आरज़ू का हासिल तिरे लब की मुस्कुराहट
हैं क़ुबूल मुझ को सब ग़म तिरी इक ख़ुशी के बदले
Kashif Adeeb Makanpuri
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शबो रोज़ की चाकरी ज़िन्दगी की
मुयस्सर हुईं रोटियाँ दो घड़ी की

नहीं काम आएँ जो इक दिन मशीनें
ज़रूरत बने आदमी आदमी की

कि कल शाम फ़ुरसत में आई उदासी
बता दी मुझे क़ीमतें हर ख़ुशी की

किया क्या अमन जी ने बाइस बरस में
कभी जी लिया तो कभी ख़ुद-कुशी की

ग़मों को ठिकाने लगाते लगाते
घड़ी आ गई आदमी के ग़मी की

ये सारी तपस्या का कारण यही है
मिसालें बनें तो बनें सादगी की
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Aman G Mishra
मुझ सेे होकर के ही बे-ज़ार चले जाते हैं
मेरी महफ़िल से मेरे यार चले जाते हैं

मुझ को मालूम है रहता नहीं है अब वो वहाँँ
साल में फिर भी हम इक बार चले जाते हैं
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Dipendra Singh 'Raaz'
ये उस की मेहरबानी है वो घर में ही सँवरती है
निकल आए जो महफ़िल में तो क़त्ल-ए-आम हो जाए
Ashraf Jahangeer
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मुझे ख़बर नहीं ग़म क्या है और ख़ुशी क्या है
ये ज़िंदगी की है सूरत तो ज़िंदगी क्या है
Shadan Ahsan Marehrvi
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ख़ुदा का शुक्र अदा कर वो बे-वफ़ा निकला
ख़ुशी मना कि तिरी जान की बहाली हुई
Shakeel Jamali
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तुम्हारे बा'द इस आँगन में फूल खिलने पर
ख़ुशी हुई भी तो ये दुख हुआ कि दें किस को
Mohit Dixit
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हम ऐसे लोग भी जाने कहाँ से आते हैं
ख़ुशी में रोते हैं जो ग़म में मुस्कुराते हैं

हमारा साथ भला कब तलक निभाते आप
कभी कभी तो हमीं ख़ुद से ऊब जाते हैं
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Mohit Dixit
मुझ को गया था छोड़ के वो कितने तैश में
लेकिन ख़ुशी से रह न सका एक साल भी
Ankit Maurya
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कभी तो नस्ल-ओ-वतन-परस्ती की तीरगी को शिकस्त होगी
कभी तो शाम-ए-अलम मिटेगी कभी तो सुब्ह-ए-ख़ुशी मिलेगी
Abul mujahid zaid
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पहले थोड़ी मुश्किल होगी
आगे लेकिन मंज़िल होगी

सब बाराती शाइ'र होंगे
मेरी शादी महफ़िल होगी
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Tanoj Dadhich
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सितम तो ये है कि वो भी न बन सका अपना
क़ुबूल हम ने किए जिस के ग़म ख़ुशी की तरह

कभी न सोचा था हम ने 'क़तील' उस के लिए
करेगा हम पे सितम वो भी हर किसी की तरह
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Qateel Shifai
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चराग़ बन के जली थी मैं जिस की महफ़िल में
उसे रुला तो गया कम से कम धुआँ मेरा
Aziz Bano Darab Wafa
तमाम उम्र इसी रंज में तमाम हुई
कभी ये तुम ने न पूछा तेरी ख़ुशी क्या है
Ahsan Marahravi
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नहीं नहीं हमें अब तेरी जुस्तुजू भी नहीं
तुझे भी भूल गए हम तिरी ख़ुशी के लिए
Zehra Nigaah
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ये बे-सबब नहीं आए हैं आँख में आँसू
ख़ुशी का लम्हा कोई याद आ गया होगा
Akhtar Saeed Khan
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अब तो ख़ुशी का ग़म है न ग़म की ख़ुशी मुझे
बे-हिस बना चुकी है बहुत ज़िंदगी मुझे
Shakeel Badayuni
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ग़म ही चाँदी है ग़म ही सोना है
ग़म न होगा तो क्या ख़ुशी होगी
Iftikhar Imam Siddiqi
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ज़िंदगी और मौत का मतलब
तुम को पाना है तुम को खोना है

उठ के महफ़िल से मत चले जाना
तुम से रौशन ये कोना कोना है
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Wajida Tabassum
सरसरी अंदाज़ से देखोगे तो महफ़िल ही महफ़िल
ग़ौर से देखोगे तो हर आदमी तन्हा लगेगा
Shuja Khawar
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हट के देखेंगे उसे रौनक़-ए-महफ़िल से कभी
सब्ज़ मौसम में तो हर पेड़ हरा लगता है
Irfan Siddiqi
ये मोहब्बत में बड़ी हार समझ लो मेरी
आज मैं उस की ख़ुशी में दुखी मालूम पड़ा
Haresh Vanza
मैं कैसे हार मानूँ बिन लड़े ग़ुरबत के सहरा से
अभी तो ग़म भुलाने हैं ख़ुशी का बीज बोना है
Amaan Pathan
मुस्कुराए हम उस से मिलते वक़्त
रो न पड़ते अगर ख़ुशी होती
Jaun Elia
मुझ से आगे नज़र आने में ख़ुशी थी उस की
मेरी ज़ंजीर से ज़ंजीर बड़ी थी उस की
Shaheen Abbas
ज़िन्दगी के सफ़र में ख़ुशी और ग़म का अपना अपना क़िस्सा है
अच्छा नहीं तो बुरा ही सही, पर वो शख़्स मेरी कहानी का हिस्सा है
Shashank Tripathi
कई ग़म से परेशाँ है ख़ुशी सब को नहीं हासिल
जहाँ में कोई होता है कि जो बिखरा नहीं होता
karan singh rajput
तरसते है यहाँ पर सब ख़ुशी को
किसी से अब नहीं शिकवा किसी को
Lokesh Singh
वस्ल हिज्र वादे सब इक आह में शरीक थे
हम किसी की महफ़िल ए निकाह में शरीक थे
Aarush Sarkaar
ग़मज़दा इस ज़िन्दगी को देखते हैं
और फिर अपनी घड़ी को देखते हैं

ये ख़ुशी भी जाँ कि मर के चैन से हम
जी रहे हर आदमी को देखते हैं
Read Full
Prashant Sitapuri
सितम ये था मुझे समझा नहीं वो
ख़ुशी ये है मुझे पढ़ते हो तुम सब
Kush Pandey ' Saarang '
मैं ख़ुशी से कर लेता, खुद-कुशी, कई सौ बार
मुझ को खा गया घर का ख़याल भी, उन्हीं सौ बार
Ankit
उदासी है चले जाने से तेरे जो
कि लगता है ख़ुशी तो अब नहीं आनी
Kohar
हम वही हैं जो कभी रौनक़-ए-महफ़िल थे यहाँ
और अभी कोई हमें पूछने वाला भी नहीं
Ramnath Shodharthi
ख़ुशी ढूँढ़ने जब चलूँगा
मैं तुझ से गले आ लगूँगा
Kohar
किताबों सा खुला हूँ मैं, कहाँ मैं कुछ छुपाता हूँ
कहानी अपने जीवन की मैं हर महफ़िल में गाता हूँ

मोहब्बत का बड़ा शाइ'र था बेगम से मगर हारा
वो उतना रूठ जाती है उसे जितना मनाता हूँ
Read Full
Alankrat Srivastava
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बहुत ख़ुशी है हमें, तुम आए, यक़ीन मानो बहुत ख़ुशी है
बचा रखे थे बहुत से आसूँ पता नहीं क्यूँ निकल न पाए
Ahad Ahmed