Deep kamal panecha

Deep kamal panecha

@Deepkamal

Deep kamal panecha shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Deep kamal panecha's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
निगाहों के सागरों से पानी छलक न जाए कहीं हमारा
अज़ाब-ए-दिल पे न रोने का टूट ये न जाए यक़ीं हमारा

तो शोख़ी तो देखो उन की वो बस हमारे ही वास्ते हैं ऐसे
वो चारा-गर बन गए हैं अब पर इलाज करते नहीं हमारा
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Deep kamal panecha
डूब ही जानी है कश्ती रेत के सहरा में भी दोस्त
तुम जरा हम-राज़ अपनों को बना कर के तो देखो
Deep kamal panecha
हम ने माँगा फ़क़त अपने हक़ का ही है
"दीप" चौखट पे तेरी सवाली नहीं
Deep kamal panecha
ये दिल है तेरा या मेरा ख़याल कुछ भी नहीं
ये शाम है या सवेरा ख़याल कुछ भी नहीं

याँ इक मैं हूँ जिस को तेरा ही है ख़याल फ़क़त
वाँ इक तू है जिस को मेरा ख़याल कुछ भी नहीं
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Deep kamal panecha
क़लह ख़ामोश करने घर की मन के काले जाएँगे
मुझे डस लेंगे लेकिन फिर भी बिच्छू पाले जाएँगे

मिरे दुश्मन जो आ तो मैं गया ना अपनी करने पे
जनाज़े को भी तेरे शानों के पड़ लाले जाएँगे
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Deep kamal panecha
इश्क़ का बस यही तो मज़ा है
हिज्र के बा'द मिलती क़ज़ा है

मौत से ख़ौफ थोड़ी है, आए
अब तो बे-इश्क़ ये ही रज़ा है
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Deep kamal panecha
एक घर में पूरा का पूरा जहाँ है
ढूँढ़ते तो हम ही हैं बाहर कहाँ है

क्यूँँ मैं ऊपर बैठे पूजूँ उस ख़ुदा को
जब कि घर में बैठी भगवन मेरी माँ है
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Deep kamal panecha
हम तो वो हैं कोई हम को चाहता ही है नहीं
चाहते भी हम यही है कोई हम को चाहे ही न
Deep kamal panecha
अब मैं नहीं जलाता दिया शब अँधेरे में
साया तुम्हारा दिखता है मुझ को चराग़ में
Deep kamal panecha
ये नई चादर जो लाई जा रही है
तेरे बिस्तर पे बिछाई जा रही है

ख़ुश है ना तू ग़ैर रिश्ते में तभी बससज ये तेरी सजाई जा रही है
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Deep kamal panecha
आशिक़ दिवाना मजनूँ या पागल कहो हमें
अब और हम बनें तिरे शाइ'र ये दिल करे
Deep kamal panecha
मेरे ज़ख़्म चीख़ के बताते हाल हैं उन्हें
अपने कान से नहीं जो अपने दिल से बहरे हैं

खोल देता हूँ मैं उन के आगे अपने सारे राज
पर उन्हें तो लगता हैं ये सारे मेरे चेहरे हैं
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Deep kamal panecha
शब-ए-फ़िराक़ पूरी रात सोना चाहिए हमें
मगर ये क्या सितम तिरे ख़याल बो रहे हैं हम

शब-ए-विसाल पूरी रात जगना चाहिए हमें
मगर ये क्या सितम सुकूँ की नींद सो रहे हैं हम
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Deep kamal panecha
ये जंग खौफ़-ज़दा यूँँ लड़ी नहीं जाती
जो आप होते यहाँ फिर तो अपने घर जाते

दिए हैं ज़ख़्म हमें ज़िन्दगी ने कुछ ऐसे
जो आप एक भी इन में से खाते मर जाते
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Deep kamal panecha
वो पड़े इस बात पे हम सेे उलझ के आज दिन में
आपने कैसे तो कैसे सुब्ह दूजा चाँद देखा
Deep kamal panecha
मुझ को गिराने में यूँँ मशग़ूल मेरे अपने
मुझ को गिराते ख़ुद अपने आप गिर गए हैं
Deep kamal panecha
अब मैं नहीं जलाता दीया शब अँधेरे में
साया तुम्हारा दिखता हैं मुझ को चराग़ में
Deep kamal panecha
मैं ने माँगा फ़क़त अपने हक़ का ही है
'दीप' तो तेरे दर पे सवाली नहीं
Deep kamal panecha
रात भर जगने का उस सेे पूछें सबब
आप का कर के दीदार जो सोया हो
Deep kamal panecha
नज़रों निग़ाहों में उन की बात कुछ तो होगी
यूँँ ही शराब इस बामण ने नहीं चखी है
Deep kamal panecha

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