Kumar gyaneshwar

Kumar gyaneshwar

@Gyaneshwar

Kumar gyaneshwar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Kumar gyaneshwar's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
देखो इतना भी ये आसान नहीं होता है
ग़म हो तो कौन परेशान नहीं होता है
इश्क़ में ख़ुद-कुशी करने जा रहे ऐ लड़के
तुम तो कहते थे कि नुक़सान नहीं होता है
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Kumar gyaneshwar
दुआएँ देता है पर मसअले का हल नहीं करता
मैं और करता भी क्या ख़ुद को अगर पागल नहीं करता

मोहब्बत भी नहीं मिलती न दिल ये टूटता ही है
ख़ुदा मुझ को किसी भी काम में अव्वल नहीं करता
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Kumar gyaneshwar
कोई इस दर्जा न हो आसान मुझ पर
यूँँ लगे अब हो रहा एहसान मुझ पर

एक रिश्ता एक वा'दा एक लड़की
बस हुआ इतनों का ही नुक़्सान मुझ पर
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Kumar gyaneshwar
अगर ये आख़री है ईद तो ख़ुदा मुझ को
गले लगाए वो और ईद ये मुबारक हो
Kumar gyaneshwar
दु'आओं में अगर मेरे असर आए
तू मुझ सेे मिलने यूँँ ही उम्र भर आए

तुझे यूँँ देखने के बा'द मुमकिन है
ख़ुदा इक रोज़ धरती पे उतर आए
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Kumar gyaneshwar
चाहते हो उसे पता न लगे
दूसरा इश्क़ दूसरा न लगे

बेवफ़ाई गुनाह है और तुम
सोचते हो कि बद-दु'आ न लगे
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Kumar gyaneshwar
जो बच्चे अपनी नादानी में करते हैं
वो सब हम जैसे हैरानी में करते हैं

न पूछो फ़ायदा हम सेे मोहब्बत का
यही इक काम नुक़सानी में करते हैं
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Kumar gyaneshwar
जो बना के तुझ को दुनिया हसीं नहीं करता
फिर यहाँ ख़ुदा पर कोई यक़ीं नहीं करता
Kumar gyaneshwar
तेरे जाने के सद
में से कभी बाहर नहीं आए
और हम को इम्तिहान-ए-इश्क़ में नंबर नहीं आए


हमारे साथ चलने की तमन्ना रखने वाले तुम

ये भी अब चाहते हो राह में पत्थर नहीं आए
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Kumar gyaneshwar
एक तस्वीर जो बन आती है बीनाई में
याद बस उस को ही करता हूँ मैं तन्हाई में

हम को अब जाके ये मालूम हुआ है यारों
कितना कुछ होता है इक शख़्स की परछाई में
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Kumar gyaneshwar
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ये मैं ने कब कहा कि बस मुझी से राब्ता रहे
अगर जो कुछ नहीं है तो मिरी जाँ फ़ासला रहे

तेरे दिए हुए वो सारे फूल सूख जाने हैं
तेरा दिया हुआ ये ज़ख़्म तो हरा भरा रहे
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Kumar gyaneshwar
रंग लाल और इक अदा-ए-ख़ास चेहरा
जी रहा है देख कर जिसे उदास चेहरा

क्यूँ करें ग़मो का ज़िक्र अब किसी के पास हम
साथ है मिरे जो एक ग़म शनास चेहरा
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Kumar gyaneshwar
वफ़ा की बात पर इतनी शिकायत कौन करता है
न जाने इन गुलाबों से मोहब्बत कौन करता है


हमारे साथ रह कर तुम भी इतना सीख जाओगे

पुरानी याद की आख़िर हिफाज़त कौन करता है।
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Kumar gyaneshwar