Kavi Naman bharat

Kavi Naman bharat

@Mrnamank231

Kavi Naman bharat shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Kavi Naman bharat's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
स्वयं की खोज में जिस ने स्वयं का मूल जाना है
नुकीले शूल को उस ने यहाँ पर फूल जाना है

सभी नदियों की चाहत है समुंदर जीत लेना पर
समुंदर से मिलन पर तो स्वयं को भूल जाना है
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Kavi Naman bharat
जिसे तुम जान कहते हो
सुनो वो जानलेवा है
Kavi Naman bharat
भले हो सामने मख़मल मगर हम रह नहीं सकते
दिशा प्रतिकूल हो लेकिन अभी हम बह नहीं सकते

है असमंजस यही जीवन की राहों का सुनो यारों
जिसे हम सह नहीं सकते उसे ही कह नहीं सकते
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Kavi Naman bharat
बदल सब दिया पर बदल मैं न पाया
तुम्हारा असर इस तरह से हुआ है
Kavi Naman bharat
बहुत मेकअप लगाती है, हमें नखरे दिखाती है
कभी नज़रें चुराती है कभी हम को सताती है

नज़र उस की करे घाइल लबों का काम है मरहम
मुहब्बत दर्द देती है मगर जीना सिखाती है
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Kavi Naman bharat
मुहब्बत दर्द देती है ,मुझे ये जानकारी है
मगर कुछ कर नहीं सकता वो लड़की जाँ हमारी है
Kavi Naman bharat
प्यार की बात आए बुलाना मुझे
छोड़ के मैं ज़माना चला आऊँगा
Kavi Naman bharat
मिला हर ग़म पुराना अब, हमें है भाता जानेमन
उन्हीं ग़म के सहारे दिल, तुम्हें है पाता जानेमन

अगर तुम छोड़ कर हम को, न जाती इस तरह से तो
ज़माना जीतने का दम, कहाँ से आता जानेमन
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Kavi Naman bharat
ये जो सारा ज़माना मुझे चाहता
एक तुम हो हमें जो नहीं चाहते
Kavi Naman bharat
कहानी बेबफाओं की ,तिरा किरदार लगती हैं,
प्रणय राहें भी अब हम को, व्यथा आधार लगती हैं

कभी उस ने दिया धोखा, हमें तो प्यार में जैसा,
हमें तो प्यार की बातें ,सभी बेकार लगती हैं
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Kavi Naman bharat
भोर की तो प्रतीक्षा करे रात है,
बा'द उस के नई इक मुलाक़ात है

पास आना हमारा अधूरा अभी,
दूर जाना बहुत दूर की बात है
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Kavi Naman bharat
एक जीवन बनाने चले हम जहाँ
राह में तो मरण से ही सजना पड़ा

प्रेम पाने को जीवन बनाना जो था
प्रेम पाने में पर प्रेम त्यजना पड़ा
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Kavi Naman bharat
सुनी बात जग की,तो ऐसा हुआ फिर,
जले जल में रघुवर,सिया के विरह में
Kavi Naman bharat
राम को जो लिखा राममय हो गए
राम के नाम से शब्द लय हो गए
Kavi Naman bharat
सभी सोचते थे हमारा विरह है
बिछड़ के अलग हम हुए ही नहीं थे
Kavi Naman bharat
हृदय में बसे हों अगर राम तेरे
बनेंगे सभी फिर रुके काम तेरे
Kavi Naman bharat
इक अधूरे सपन का न पाना हुआ
आँसुओं का बहुत पर कमाना हुआ

प्रेम को खोजते खोजते खो गए
प्रेम की खोज में प्रेम जाना हुआ
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Kavi Naman bharat
जो हुए हैं सृजित उन को ढहना ही है,
तीर की खोज में सब को बहना ही है

पीर सब को यहाँ होती जीवन में पर,
रोज़ सहना यहाँ फिर भी रहना ही है
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Kavi Naman bharat
कलयुगी प्रेम वो जो टिका स्वार्थ पर,
प्रेम करना यहाँ तो स्वयं से करो
Kavi Naman bharat
जब कभी निज मिलन को जो हम जाते हैं,
कुछ अगर हो गिला वो भी कम जाते हैं

मोह जब तक रहे, रोते रहते हैं सब,
इक समय बा'द आँसू भी थम जाते हैं
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Kavi Naman bharat

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