Avijit Aman

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@Poetavijitaman

Avijit Aman shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Avijit Aman's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
बड़ी शिद्दत से दिल तोड़ा है तुम ने
सिला अच्छा दिया है आशिक़ी का
Avijit Aman
अना को शांत रखिए आप अपनी
बुरा होता है अनुभव कचहरी का

लो मौसम आ गया दिल टूटने का
हमें डर लग रहा है फरवरी का
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Avijit Aman
ध्यान से पढ़िए मुझे सब
थोड़ी मुश्किल शा'इरी हूँ
Avijit Aman
ख़ुशी से तन का हिस्सा खा रही है
हमें तो कल की चिंता खा रही है

अभी भी वक़्त है आ कर बचा लो
अना ये अपना रिश्ता खा रही है
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Avijit Aman
यार जिस पे बीतती है
बस वही दुख जानता है
Avijit Aman
और कोई भी ख़्वाहिश नहीं है
बस यही इक ज़रूरत है मेरी

सब बहुत बा'द आते हैं इस के
चाय पहली मुहब्बत है मेरी
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Avijit Aman
है करनी नौकरी भी और पढ़ना साथ है हम को
हमीं को घर चलाना है हमीं को सोचना है सब

पिता जी की इन्हीं बातों ने कर डाला बड़ा मुझ को
तुम्हीं से आस है सब को तुम्हीं को देखना है सब
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Avijit Aman
कोई भी बात काटे नहीं कटती है
ग़म की बरसात काटे नहीं कटती है

दिन तो कट जाता है जैसे तैसे यहाँ
मुझ सेे ये रात काटे नहीं कटती है
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Avijit Aman
मुहब्बत दोस्तों की ऐसी है मुझ सेे
ज़रूरत पड़ने पर वो फोन करते हैं
Avijit Aman
हम सभी सरहदों से गुज़र सकते हैं
गहरे से गहरे दरिया उतर सकते हैं

प्यार को यार कम मत समझना कभी
हम तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकते हैं
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Avijit Aman
तन्हा ख़ामोशी में रहने की
बातें ख़ुद से ही सब कहने की

मेरी परवाह मत करना तुम
मुझ को आदत है दुख सहने की
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Avijit Aman
धड़कते दिल को भी बे-जान समझा है
हमारे ग़म को भी आसान समझा है

हमेशा तोड़ देती हो न जाने क्यूँँ
हमें क्या खेल का सामान समझा है
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Avijit Aman
कमाने का हुनर भी देखना है
कि मुश्किल हर सफ़र भी देखना है

तुम्हें तो इक मुहब्बत करनी है बस
हमें तो अपना घर भी देखना है
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Avijit Aman
हमेशा तोड़ देती हो न जाने क्यूँँ
हमें क्या खेल का सामान समझा है
Avijit Aman
सिर्फ़ तुम को ही माना है अपना
सिर्फ़ तुम को ही तरजीह दी है
Avijit Aman
याद कब से तुम्हारी मुझे आ रही
आके मुझ को गले से लगा लो न तुम
Avijit Aman
चूम कर हाथ मेरे कहा उस ने ये
क्या लिखी है ग़ज़ब शा'इरी आपने
Avijit Aman
इतनी आसाँ नहीं ज़िंदगी है 'अमन'
पाँव के छाले हम को बताते हैं ये
Avijit Aman
बात लग जाती है दिल पे कोई 'अमन'
हम फ़क़त यूँँ ही ग़ुस्सा नहीं होते हैं
Avijit Aman
न जाने कौन सा ग़म ढो रहे हो
लगाकर दिल किसी से रो रहे हो

ज़रा ख़ुद को कभी तुम यार देखो
कि क्या थे यार तुम क्या हो रहे हो
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Avijit Aman

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