Surendra Bhatia "Salil"

Surendra Bhatia "Salil"

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Surendra Bhatia "Salil" shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Surendra Bhatia "Salil"'s shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
दिमाग़-ओ-दिल की बाज़ी में ये दिल ही हार जाता है
सयाना ज़ेहन है हर बार बाज़ी मार जाता है

ये दरिया है जहाँ की रीत के विपरीत ही बहता
जो तैरे डूब जाता है जो डूबे पार जाता है
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Surendra Bhatia "Salil"
वो बस इक रेत है जो छूट जाती है हथेली से
मैं दुनिया जीत कर भी क़ैद उस को रख नहीं सकता

अभी है जो है जी लो ज़िन्दगी है आग पर पानी
हवा हो जाएगी कल चाह भी फिर चख नहीं सकता
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Surendra Bhatia "Salil"
तलब है यूँँ ही जीने की फ़क़त तेरी ही संगत में
ये तेरे हाथ रँगने हैं फ़क़त मेरी ही रंगत में
Surendra Bhatia "Salil"
तुम्हारे हाथ में दिखता रहेगा नूर मेहँदी का
हमें भी आ रहा है बारहा दस्तूर मेहँदी का
Surendra Bhatia "Salil"
चंद लम्हें ज़िन्दगी जीने को भी
मुद्दतों तक ज़िंदा दिखना पड़ता है

घर पे कुछ शा
में बिताने के लिए
दिन महीनों कोड लिखना पड़ता है
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Surendra Bhatia "Salil"
मैं पोशीदा नहीं रहता तेरी नज़रों में ख़ामी है
तू भीतर ढूँढ़ ले मुझ को मेरी हामी ही हामी है
Surendra Bhatia "Salil"
हमारे दिल की बंदिश से रिहा हैं वो परिंदे जो
पराए आसमाँ में ख़्वाहिश-ए-परवाज़ रखते हैं
Surendra Bhatia "Salil"
तरन्नुम साज़ का मेरे उसे नासाज़ लगता है
मेरी ख़ामोशियों में भी उसे इक राज़ लगता है

ख़ुदा अब बख़्श भी दे दिल को मेरे उल्फ़तें उस की
तुझे भी रास आता उस का ही अंदाज़ लगता है
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Surendra Bhatia "Salil"
उन्होंने चार लफ़्ज़ों में ही दिल की बात कह डाली
हमें इक उम्र बीती बोलने में हाल-ए-दिल अपना
Surendra Bhatia "Salil"
इश्क़ का वो ऐसा कारोबार रखते हैं
हम से पहले दूसरा तैयार रखते हैं

दिल-लगी का शौक़ है कुछ इस क़दर उन को
मुन्तज़िर कितने सर-ए-बाज़ार रखते हैं
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Surendra Bhatia "Salil"
अभी तक खोया रहता हूँ ख़यालों में उसी के मैं
था पहले उस का आशिक़ अब हूँ उस की बेवफ़ाई का
Surendra Bhatia "Salil"
कहाँ तो आसमाँ तक गाँव में परवाज़ होती थी
यहाँ अँगड़ाई भी लो हाथ जा के छत में लगता है
Surendra Bhatia "Salil"
वो क़ातिल फेर कर नज़रें बड़ा एहसान करता है
अभी तक हम जो ज़िन्दा हैं उसी की मेहरबानी है
Surendra Bhatia "Salil"
वो कहती है कि लाखों हैं मगर शाइ'र नहीं तुम सा
सलिल तुम बात भी कह दो ग़ज़ल मालूम होती है
Surendra Bhatia "Salil"
बड़ा मायूस है बूढ़ा कहा है जब से बेटे ने
हो छोटे शहर से तुम ये बड़े शहरों की बातें हैं
Surendra Bhatia "Salil"
हज़ारों बार मौजें चूर कर जाती हैं घर मेरा
ख़ता इतनी फ़क़त साहिल पे डेरा डाल बैठा हूँ

सदा-ए-रूह ने मुझ को ही ठहराया 'सलिल' दोषी
हो बे-ख़ुद आज उस से पूछ अपना हाल बैठा हूँ
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Surendra Bhatia "Salil"
हिना का रंग बदलेगा न दिल के साज़ बदलेंगे
बदलते वक़्त में बस इश्क़ के अंदाज़ बदलेंगे
Surendra Bhatia "Salil"
वही जज़्बा-ए-साहिल तोड़ने को लश्कर-ए-मौजाँ
समुंदर तुझ से तो कुछ और ही उम्मीद थी मुझ को
Surendra Bhatia "Salil"