Sad Shayari Collection - Dil ke dard aur tanha lamhon ki gehri shayari

Sad shayari beautifully expresses the pain, silence, and unspoken emotions hidden deep inside the heart. Whether it’s heartbreak, loneliness, or quiet regret, these lines help give words to feelings that are hard to say. Perfect for sharing your udaasi in a subtle and poetic way.

udaasi shayari
जौन तुम्हें ये दौर मुबारक, दूर ग़म-ए-अय्याम से हो
एक पागल लड़की को भुला कर अब तो बड़े आराम से हो
Jaun Elia
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udasi shayari
दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है
लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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gham shayari
आज तो दिल के दर्द पर हँस कर
दर्द का दिल दुखा दिया मैं ने
Zubair Ali Tabish
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dard shayari
बे-नाम सा ये दर्द ठहर क्यूँँ नहीं जाता
जो बीत गया है वो गुज़र क्यूँँ नहीं जाता
Nida Fazli
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tanha shayari
ख़ुदा को मान कि तुझ लब के चूमने के सिवा
कोई इलाज नहीं आज की उदासी का
Zafar Iqbal
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tanhai shayari
दर्द हो दिल में तो दवा कीजे
दिल ही जब दर्द हो तो क्या कीजे
Mirza Ghalib
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dukhi shayari
तल्ख़ियाँ इस में बहुत कुछ हैं मज़ा कुछ भी नहीं
ज़िंदगी दर्द-ए-मोहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं
Kaleem Aajiz
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afsos shayari
ज़िंदगी कितनी मसर्रत से गुज़रती या रब
ऐश की तरह अगर ग़म भी गवारा होता
Akhtar Shirani
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mayusi shayari
ज़ख़्म कहते हैं दिल का गहना है
दर्द दिल का लिबास होता है
Gulzar
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udaasi shayari
अब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द मिटा दें
कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिए हैं
Jaan Nisar Akhtar
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udasi shayari
इंसान अपने आप में मजबूर है बहुत
कोई नहीं है बे-वफ़ा अफ़्सोस मत करो
Bashir Badr
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तुम्हें ये ग़म है कि अब चिट्ठियाँ नहीं आती
हमारी सोचो हमें हिचकियाँ नहीं आती
Charagh Sharma
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मैं न सोया रात सारी तुम कहो
बिन मेरे कैसे गुज़ारी, तुम कहो

हिज्र, आँसू, दर्द, आहें, शा'इरी
ये तो बातें थीं हमारी, तुम कहो
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Prakhar Kanha
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अफ़सोस हो रहा है तेरी शक्ल देख कर
क्या कोई तेरा चाहने वाला नहीं रहा
Abbas Tabish
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उदासी का सबब दो चार ग़म होते तो कह देता
फ़ुलाँ को भूल बैठा हूँ फ़ुलाँ की याद आती है
Ashu Mishra
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कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब
आज तुम याद बे-हिसाब आए
Faiz Ahmad Faiz
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ज़िंदगी क्या किसी मुफ़लिस की क़बा है जिस में
हर घड़ी दर्द के पैवंद लगे जाते हैं
Faiz Ahmad Faiz
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अब जो कोई पूछे भी तो उस से क्या शरह-ए-हालात करें
दिल ठहरे तो दर्द सुनाएँ दर्द थमें तो बात करें
Faiz Ahmad Faiz
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कब ठहरेगा दर्द ऐ दिल कब रात बसर होगी
सुनते थे वो आएँगे सुनते थे सहर होगी
Faiz Ahmad Faiz
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ईद ख़ुशियों का दिन सही लेकिन
इक उदासी भी साथ लाती है

ज़ख़्म उभरते हैं जाने कब कब के
जाने किस किस की याद आती है
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Farhat Ehsaas
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ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो
नश्शा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिलें
Ahmad Faraz
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अब लगता है ठीक कहा था 'ग़ालिब' ने
बढ़ते बढ़ते दर्द दवा हो जाता है
Madan Mohan Danish
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जो शे'र समझे मुझे दाद वाद देता रहे
गले लगाए जिसे ग़म समझ में आ जाए
Balmohan Pandey
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सुन कर तमाम रात मेरी दास्तान-ए-ग़म
बोले तो सिर्फ़ ये कि बहुत बोलते हो तुम
Firaq Gorakhpuri
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हमारा दिल तो हमेशा से इक जगह पर है
तुम्हारा दर्द ही रस्ता भटक गया होगा
Zubair Ali Tabish
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जमा हम ने किया है ग़म दिल में
इस का अब सूद खाए जाएँगे
Jaun Elia
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सारी दुनिया के ग़म हमारे हैं
और सितम ये कि हम तुम्हारे हैं
Jaun Elia
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मेरे कमरे में उदासी है क़यामत की मगर
एक तस्वीर पुरानी सी हँसा करती है
Abbas Qamar
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उस हिज्र पे तोहमत कि जिसे वस्ल की ज़िद हो
उस दर्द पे ला'नत की जो अश'आर में आ जाए
Vipul Kumar
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आँसुओं से लिख रहे हैं बेबसी की दास्ताँ
लग रहा है दर्द की तस्वीर बन जाएँगे हम
Azm Shakri
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सारे दुख सो जाएँगे लेकिन इक ऐसा ग़म भी है
जो मिरे बिस्तर पे सदियों का सफ़र रख जाएगा
Azm Shakri
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कौन देकर गया दुआ दिल को
उम्र भर दर्द ही रहा दिल को

दस्तकें दे रहा है कुछ दिन से
हम सेे क्या काम पड़ गया दिल को
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Subhan Asad
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हम कुछ ऐसे उस के आगे अपनी वफ़ा रख देते हैं
बच्चे जैसे रेल की पटरी पर सिक्का रख देते हैं

तस्वीर-ए-ग़म, दिल के आँसू, रंज-ओ-नदामत, तन्हाई
उस को ख़त लिखते हैं ख़त में हम क्या क्या रख देते हैं
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Subhan Asad
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दिल गया रौनक़-ए-हयात गई
ग़म गया सारी काएनात गई
Jigar Moradabadi
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दिल ही तो है न संग-ओ-ख़िश्त दर्द से भर न आए क्यूँँ
रोएँगे हम हज़ार बार कोई हमें सताए क्यूँँ
Mirza Ghalib
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इश्क़ से तबीअत ने ज़ीस्त का मज़ा पाया
दर्द की दवा पाई दर्द-ए-बे-दवा पाया
Mirza Ghalib
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वक़्त अच्छा भी आएगा 'नासिर'
ग़म न कर ज़िंदगी पड़ी है अभी
Nasir Kazmi
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ग़म के पीछे मारे मारे फिरना क्या
ये दौलत तो घर बैठे आ जाती है
Shakeel Jamali
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ग़म-ए-हयात ने आवारा कर दिया वर्ना
थी आरज़ू कि तिरे दर पे सुब्ह ओ शाम करें
Majrooh Sultanpuri
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अब कारगह-ए-दहर में लगता है बहुत दिल
ऐ दोस्त कहीं ये भी तिरा ग़म तो नहीं है
Majrooh Sultanpuri
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ज़रा मौसम तो बदला है मगर पेड़ों की शाख़ों पर नए पत्तों के आने में अभी कुछ दिन लगेंगे
बहुत से ज़र्द चेहरों पर ग़ुबार-ए-ग़म है कम बे-शक पर उन को मुस्कुराने में अभी कुछ दिन लगेंगे
Javed Akhtar
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ग़म और ख़ुशी में फ़र्क़ न महसूस हो जहाँ
मैं दिल को उस मक़ाम पे लाता चला गया
Sahir Ludhianvi
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अपनी तबाहियों का मुझे कोई ग़म नहीं
तुम ने किसी के साथ मोहब्बत निभा तो दी
Sahir Ludhianvi
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क्या ख़ुशी में ज़िंदगी का होश कम रह जाएगा
ग़म अगर मिट भी गया एहसास-ए-ग़म रह जाएगा
Shakeel Badayuni
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दिल नज़र बन जाएगा ग़म हर ख़ुशी हो जाएगी
आप के जाते ही दुनिया दूसरी हो जाएगी
Shakeel Badayuni
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ग़म बयाँ करने का कोई और ढंग ईजाद कर
तेरी आँखों का ये पानी तो पुराना हो गया
Waseem Barelvi
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मशहूर भी हैं बदनाम भी हैं ख़ुशियों के नए पैग़ाम भी हैं
कुछ ग़म के बड़े इनआ'म भी हैं पढ़िए तो कहानी काम की है
Anjum Barabankvi
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दिल हिज्र के दर्द से बोझल है अब आन मिलो तो बेहतर हो
इस बात से हम को क्या मतलब ये कैसे हो ये क्यूँँकर हो
Ibn E Insha
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आन के इस बीमार को देखे तुझ को भी तौफ़ीक़ हुई
लब पर उस के नाम था तेरा जब भी दर्द शदीद हुआ
Ibn E Insha
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दीदा ओ दिल ने दर्द की अपने बात भी की तो किस से की
वो तो दर्द का बानी ठहरा वो क्या दर्द बटाएगा
Ibn E Insha
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पत्थर के जिगर वालो ग़म में वो रवानी है
ख़ुद राह बना लेगा बहता हुआ पानी है
Bashir Badr
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कोई ख़ुद-कुशी की तरफ़ चल दिया
उदासी की मेहनत ठिकाने लगी
Adil Mansuri
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ज़िंदा हूँ इस तरह कि ग़म-ए-ज़िंदगी नहीं
जलता हुआ दिया हूँ मगर रौशनी नहीं
Behzad Lakhnavi
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तेरे जाने से ज़्यादा हैं न कम पहले थे
हम को लाहक़ हैं वही अब भी जो ग़म पहले थे
Afzal Khan
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ऊपर उठती हुई एक गर्म हवा है मिरा दर्द
मेरा लहजा कभी फ़रियाद नहीं हो सकता
Farhat Ehsaas
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ख़ंजर चले किसी पे तड़पते हैं हम 'अमीर'
सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है
Ameer Minai
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ये किस मक़ाम पे लाई है ज़िंदगी हम को
हँसी लबों पे है सीने में ग़म का दफ़्तर है
Hafeez Banarasi
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जानता हूँ एक ऐसे शख़्स को मैं भी 'मुनीर'
ग़म से पत्थर हो गया लेकिन कभी रोया नहीं
Muneer Niyazi
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हाए कोई दवा करो हाए कोई दुआ करो
हाए जिगर में दर्द है हाए जिगर को क्या करूँँ
Hafeez Jalandhari
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बारे दुनिया में रहो ग़म-ज़दा या शाद रहो
ऐसा कुछ कर के चलो याँ कि बहुत याद रहो
Meer Taqi Meer
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सभी को ग़म है समुंदर के ख़ुश्क होने का
कि खेल ख़त्म हुआ कश्तियाँ डुबोने का
Shahryar
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रात भर दर्द की शम्अ' जलती रही
ग़म की लौ थरथराती रही रात भर
Makhdoom Mohiuddin
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ग़म-ए-ज़माना ने मजबूर कर दिया वर्ना
ये आरज़ू थी कि बस तेरी आरज़ू करते
Akhtar Shirani
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दर्द ऐसा नज़र-अंदाज़ नहीं कर सकते
जब्त ऐसा की हम आवाज नहीं कर सकते

बात तो तब थी कि तू छोड़ के जाता ही नहीं
अब तेरे मिलने पे हम नाज नहीं कर सकते
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Ismail Raaz
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कोई अटका हुआ है पल शायद
वक़्त में पड़ गया है बल शायद

दिल अगर है तो दर्द भी होगा
इस का कोई नहीं है हल शायद
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Gulzar
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तू अपने सारे दुख जा कर बताता है जिन्हें, इक दिन
बढ़ाएँगे वही ग़म-ख़्वार तेरी आँख का पानी
Siddharth Saaz
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गर उदासी, चिड़चिड़ापन, जान देना प्यार है
माफ़ करना, काम मुझ को और भी हैं दोस्तो
Divy Kamaldhwaj
यहाँ वो कौन है जो इंतिख़ाब-ए-ग़म पे क़ादिर हो
जो मिल जाए वही ग़म दोस्तों का मुद्दआ' होगा
Jaun Elia
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हमारे घर की दीवारों पे 'नासिर'
उदासी बाल खोले सो रही है
Nasir Kazmi
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हर ख़ुशी मुस्कुरा के कहती है
दर्द बनकर छुपे हुए हो तुम

आज आब-ओ-हवा में ख़ुश्बू है
लग रहा है घुले हुए हो तुम
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Ritesh Rajwada
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मुझे छोड़ दे मेरे हाल पर तिरा क्या भरोसा है चारा-गर
ये तिरी नवाज़िश-ए-मुख़्तसर मेरा दर्द और बढ़ा न दे
Shakeel Badayuni
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किस से जा कर माँगिये दर्द-ए-मोहब्बत की दवा
चारा-गर अब ख़ुद ही बेचारे नज़र आने लगे
Shakeel Badayuni
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कोई दवा न दे सके मशवरा-ए-दुआ दिया
चारागरों ने और भी दर्द दिल का बढ़ा दिया
Hafeez Jalandhari
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अब मिरा दर्द मिरी जान हुआ जाता है
ऐ मिरे चारागरो अब मुझे अच्छा न करो
Shahzad Ahmad
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क़ुबूल है जिन्हें ग़म भी तेरी ख़ुशी के लिए
वो जी रहे हैं हक़ीक़त में ज़िन्दगी के लिए
Nasir Kazmi
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किस से उम्मीद करें कोई इलाज-ए-दिल की
चारा-गर भी तो बहुत दर्द का मारा निकला
Lutf Ur Rahman
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चारासाज़ो मिरा इलाज करो
आज कुछ दर्द में कमी सी है
Azhar Nawaz
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दर्द सहने का अलग अंदाज़ है
जी रहे हैं हम अदा की ज़िंदगी
Farhat Abbas Shah
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बदल गए मेरे मौसम तो यार अब आए
ग़मों ने चाट लिया ग़म-गुसार अब आए
Farhat Abbas Shah
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इसी से होता है ज़ाहिर जो हाल दर्द का है
सभी को कोई न कोई वबाल दर्द का है

किसी ने पूछा के 'फ़रहत' बहुत हसीन हो तुम
तो मुस्कुरा के कहा सब जमाल दर्द का है
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Farhat Abbas Shah
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कुछ तबीयत में उदासी भी हुआ करती है
हर कोई इश्क़ का मारा हो, ज़रूरी तो नहीं
Jaani Lakhnavi
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श्याम गोकुल न जाना कि राधा का जी अब न बंसी की तानों पे लहराएगा
किस को फ़ुर्सत ग़म-ए-ज़िंदगी से यहाँ कौन बे-वक़्त के राग सुन पाएगा
Abid Hashri
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किस तरह 'अमानत' न रहूँ ग़म से मैं दिल-गीर
आँखों में फिरा करती है उस्ताद की सूरत
Amanat Lakhnavi
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हमारी उम्र के लड़के ग़ज़ल तो लिख रहे हैं पर
ये इतना दर्द ले के जी रहे हैं ठीक थोड़ी है
Ramesh Singh
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अज़ल से ले कर के आज तक मैं कभी भी तन्हा नहीं रहा हूँ
कभी थे तुम तो, कभी थी दुनिया, कभी ये ग़ज़लें, कभी उदासी
Ankit Maurya
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तन्हा होना, गुम-सुम दिखना, कुछ ना कहना... ठीक नहीं
अपने ग़म को इतना सहना, इतना सहना... ठीक नहीं

आओ दिल की मिट्टी में कुछ दिल की बातें बो दें हम
बारिश के मौसम में गमले ख़ाली रहना... ठीक नहीं
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Dev Niranjan
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तो देख लेना हमारे बच्चों के बाल जल्दी सफ़ेद होंगे
हमारी छोड़ी हुई उदासी से सात नस्लें उदास होंगी
Danish Naqvi
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मेरे तो ग़म भी ज़माने के काम आते हैं
मैं रो पड़ूँ तो कई लोग मुस्कुराते हैं
Tariq Qamar
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दर्द में शिद्दत-ए-एहसास नहीं थी पहले
ज़िंदगी राम का बन-बास नहीं थी पहले
Shakeel Azmi
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यही बहुत है मिरे ग़म में तुम शरीक हुए
मैं हॅंस पड़ूँगा अगर तुम ने अब दिलासा दिया
Imran Aami
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वो आँखें आप के ग़म में नहीं हुई हैं नम
दिया जलाते हुए हाथ जल गया होगा
Shadab Javed
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सारे ग़म भूल गए आप के रोने पे मुझे
किस को ठंडक में पसीने का ख़याल आता है

आखरी उम्र में जाते है मदीने हम लोग
मरने लगते है तो जीने का ख़याल आता है
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Nadir Ariz
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दुनिया ने तेरी याद से बेगाना कर दिया
तुझ से भी दिल-फ़रेब हैं ग़म रोज़गार के
Faiz Ahmad Faiz
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ज़िंदगी भर वो उदासी के लिए काफ़ी है
एक तस्वीर जो हँसते हुए खिंचवाई थी
Yasir Khan
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तू तो वाक़िफ़ है रिवाज़-ए-ग़म से इस के
इश्क़ तो तेरा भी ये पहला नहीं है
Siddharth Saaz
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हम चाहते थे मौत ही हम को जुदा करे
अफ़्सोस अपना साथ वहाँ तक नहीं हुआ
Waseem Nadir
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कहूँ किस से मैं कि क्या है शब-ए-ग़म बुरी बला है
मुझे क्या बुरा था मरना अगर एक बार होता
Mirza Ghalib
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दर्द चेहरा पहन के आया था
तेरा चेहरा था सो क़ुबूल किया
Aslam Rashid
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वक़्त की गर्दिशों का ग़म न करो
हौसले मुश्किलों में पलते हैं
Mahfuzur Rahman Adil
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हम आज राह-ए-तमन्ना में जी को हार आए
न दर्द-ओ-ग़म का भरोसा रहा न दुनिया का
Waheed Quraishi
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दर्द की बात किसी हँसती हुई महफ़िल में
जैसे कह दे किसी तुर्बत पे लतीफ़ा कोई
Ahmad Rahi
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ
ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है

तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें
ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Read Full
Tehzeeb Hafi
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अपना ही एक मौसम लिए फिरते हैं
लोग जो दिल को पुर-ग़म लिए फिरते हैं

चारा-गर जैसे हैं ये सुख़न-वर सभी
सबके ज़ख़्मों का मरहम लिए फिरते हैं
Read Full
Dileep Kumar
बयाँ करने बैठूँ तो बस दर्द ही हैं
मुनासिब है कह दूँ कि मैं हूँ मज़े में
Priya Dixit
उठाओ पथ्थरों को दूर फेंको
बहुत आसान है ग़म को हराना
Meem Alif Shaz
उम्र भर मेरी उदासी के लिए काफ़ी है
जो सबब मेरी ख़मोशी के लिए काफ़ी है

जान दे देंगे अगर आप कहेंगे हम सेे
जान देना ही मुआ'फ़ी के लिए काफ़ी है
Read Full
Aakash Giri
ज़िस्त की जान जाते भी देखा हूँ मैं
मौत को साँस आते भी देखा हूँ मैं

सब तो हँसते ही हैं मेरे हालात पे
दर्द को मुस्कुराते भी देखा हूँ मैं
Read Full
SHIV SAFAR
मर न जाऊँ एक दिन ग़म से कहीं
सर-ब-सर कर्ज़े में डूबा हूँ ख़ुदा
Ajeetendra Aazi Tamaam
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