Amit Nandan Dev

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@amitnandandev

Amit Nandan Dev shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Amit Nandan Dev's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
न जाने किन अदावतों के हम शिकार हो गए
कि दिल को साफ़ रक्खा तो गुनाहगार हो गए

ज़माना चाहता था हम भी उन के रंग में ढले
हम अपने रंग में रहे तो दाग़दार हो गए
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Amit Nandan Dev
तह-ब-तह तहज़ीब की चादर थी जिन चेहरों पे कल
वक़्त आया तो वही हम को बुरा कहने लगे
Amit Nandan Dev
न कोई शिकवा न आँसू न मुस्कुराहट है
वो शख़्स किस किस अदास फ़रेब करता है
Amit Nandan Dev
'देव' अब और ये ग़ज़लें नहीं होंगी हम से
सोज़-ए-ग़म है लिखा ऐसा जो मिटाए न बने
Amit Nandan Dev
हुनर है दर्द को लफ़्ज़ों में बुन के रख देना
जो शे'र तुझ पे कहूँ वो तबीब लगता है
Amit Nandan Dev
मिसरा-ए-ऊला में हर बार तेरा ज़िक्र किया
मिसरा-ए-सानी में बस ख़ुद को अधूरा पाया
Amit Nandan Dev
ग़म का मौसम था तो हम चुप थे मगर शाइ'र थे
सोच का ख़ून भी काग़ज़ पे बहाना पड़ा था
Amit Nandan Dev
बात वो कर गया यूँँ देख के कहता क्या था
साॅंस लेनी थी मगर नब्ज़ गिरानी पड़ी थी
Amit Nandan Dev
हमारा हुस्न क्या था इक फ़क़त वहम-ए-नज़र शायद
कि हर तहरीर में सौ सूरत-ए-शम्स-ओ-क़मर निकले
Amit Nandan Dev
हुनर है दिल को मुयस्सर न बद-दुआ के लिए
तबस्सुमात भी रक्खे हैं बस सज़ा के लिए
Amit Nandan Dev
तामीर से बस्ती कोई आबाद नहीं है
दीवार गिरा देने से रस्ता नहीं होता
Amit Nandan Dev
वफ़ा की बात करें या सज़ा की ज़िक्र करें
कि दोनों हुक़्म में थे और साथ साथ चले
Amit Nandan Dev
ग़ज़ल में ज़ख़्म खिलते थे क़लम था एक ख़ूँ कोई
हुनर भी मेरे अश्कों का समझता था जुनूँ कोई
Amit Nandan Dev
ज़हर में लिपटी हुई बातों से मैं महफ़ूज़ था
अब तअल्लुक़ भी निभाया है तो तर्ज़-ए-इश्क़ से
Amit Nandan Dev
बिछड़ कर लोग अक्सर भूल जाते हैं ये दुनिया भी
हमें हर मोड़ पे तेरा इशारा याद रहता है
Amit Nandan Dev
न गुल खिले न सितारों से रौशनी उतरी
तेरे बग़ैर कोई रात भी कहाँ गुज़री
Amit Nandan Dev
लबों पे आग निगाहों में रक्स-ए-ख़्वाब लिए
हम आ गए हैं मोहब्बत की इक किताब लिए
Amit Nandan Dev