Saniya Tasnim

Saniya Tasnim

@bestsaniya786

Saniya Tasnim shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Saniya Tasnim's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
हम शोर करते ख़ौफ़ में
जब ख़ामुशी पास आती थी
Saniya Tasnim
मुझ में बसी है आदत-ए-अफ़्सुर्दगी
कैसे बिताऊँ मैं मज़े की ज़िन्दगी
Saniya Tasnim
मैं हटा दीन दुनिया से तो यूँँ हुआ
बंदगी भी गई ज़िन्दगी भी गई
Saniya Tasnim
पूरे दिन बस ये हूँ हल्ला
कब चुप होगा ये मुहल्ला
Saniya Tasnim
पर्दा रखती है रिश्ते का
इज़्ज़त वो ही अस्तर है
Saniya Tasnim
बड़े शोख़ हो तुम मियाँ पर
नदामत ज़रा भर नहीं है
Saniya Tasnim
उसी के हैं दिन रात सारे
हमें जो मुयस्सर नहीं है
Saniya Tasnim
आँखों के जो अंदर है
आख़िर किस का वो घर है
Saniya Tasnim
इश्क़ होगा फिर भला होगा
मैं न कहता था बुरा होगा
Saniya Tasnim
इक आस रखी थी हम ने भी
इक ख़्वाब मिला जो टूटा था

जो नाम पुकारा था उस ने
वो नाम हमारा झूठा था
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Saniya Tasnim
हर्फ़-ए-आख़िर है अगर तो रहने दीजे
इब्तिदास इंतिहा तक का सफ़र है
Saniya Tasnim
फ़ज़ा में हर-सू जो रा'नाई है
ख़बर आमद की उन की आई है
Saniya Tasnim
किसी को ख़ामोश कर पाऊँ
कहाँ ऐसा शोर है मुझ में
Saniya Tasnim
बहती रहती हैं हवाएँ उस की जानिब
चेहरा उस का इक गुलिस्ताँ ठहरा जैसे
Saniya Tasnim
कैसे कैसे बस्ती में आए हैं ये काफ़िर
कहते हैं पत्थर से मेरा ख़ुदा निकलेगा
Saniya Tasnim
बदलती रहती है रुत ख़मोशी से
ये मौसम जैसे कोई मदारी है
Saniya Tasnim
किताबें लिखना अच्छी बात है
किताबें गर लगें लिखने तुम्हें
Saniya Tasnim
काफ़िर बुलाते हैं क्यूँँ बस्ती के मकीं
मैं ने सुना था उसे भी हाँ इश्क़ है
Saniya Tasnim
इक ही शय पर रोना है
बिखरी लय पर रोना है

तुम भी अब से साक़ी हो
अब तो मय पर रोना है
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Saniya Tasnim
ये बाज़ार में फिरने वाले 
ये इक फ़िराक़ में फिरते हैं
Saniya Tasnim

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