Farhat Abbas Shah

Farhat Abbas Shah

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Farhat Abbas Shah shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Farhat Abbas Shah's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
ये झाँक लेती है दिल से जो दूसरे दिल में
मेरी निगाह में सारा कमाल दर्द का है
Farhat Abbas Shah
हर रोज़ उठाता हूँ किसी ख़्वाब की मय्यत
और आप ये कहते हैं कि मातम न करूँँ मैं

इक शख़्स दिखा दो मुझे हँसता हुआ दिल से
गोया कि ये सब देख के भी ग़म न करूँँ मैं
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Farhat Abbas Shah
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गीत लिक्खे भी तो ऐसे के सुनाएँ न गए
ज़ख़्म यूँँ लफ़्ज़ों में उतरे के दिखाएँ न ग‌ए

आज तक रक्खे हैं पछतावे की अलमारी में
एक दो वादे जो दोनों से निभाएँ न गए
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Farhat Abbas Shah
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इसी से होता है ज़ाहिर जो हाल दर्द का है
सभी को कोई न कोई वबाल दर्द का है

किसी ने पूछा के 'फ़रहत' बहुत हसीन हो तुम
तो मुस्कुरा के कहा सब जमाल दर्द का है
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Farhat Abbas Shah
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है किसी जालिम उदू की घात दरवाज़े में है
या मसाफ़त है नई या रात दरवाज़े में है

जिस तरहा उठती है नजरें बे-इरादा बार-बार
साफ़ लगता है के कोई बात दरवाज़े में
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Farhat Abbas Shah
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बेकार ख़यालों से लिपट कर नहीं देखा
जो कुछ भी हुआ हम ने पलटकर नहीं देखा

इस डर से के कट जाए न बीनाई के रेशे
आँखों ने तेरी राहों से हटकर नहीं देखा
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Farhat Abbas Shah
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ये दिल मलूल भी कम है उदास भी कम है
कई दिनों से कोई आस पास भी कम है

हमें भी यूँ ही गुजरना पसंद है और फिर
तुम्हारा शहर मुसाफ़िर-शनास भी कम है
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Farhat Abbas Shah
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कहीं से दुख तो कहीं से घुटन उठा लाए
कहाँ-कहाँ से न दीवानापन उठा लाए

अजीब ख़्वाब था देखा के दर-ब-दर हो कर
हम अपने मुल्क से अपना वतन उठा लाए
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Farhat Abbas Shah
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बदल गए मेरे मौसम तो यार अब आए
ग़मों ने चाट लिया ग़म-गुसार अब आए
Farhat Abbas Shah
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मैं शा'इर हूँ मोहब्बत का
मिरे दुख भी रसीले हैं
Farhat Abbas Shah
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दर्द सहने का अलग अंदाज़ है
जी रहे हैं हम अदा की ज़िंदगी
Farhat Abbas Shah
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आती है परेशानी तो आता है ख़ुदा याद
वर्ना नहीं दुनिया में कोई तेरे सिवा याद
Farhat Abbas Shah
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बस एक लम्हे के सच झूट के एवज़ 'फ़रहत'
तमाम उम्र का इल्ज़ाम ले गया मुझ से
Farhat Abbas Shah
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तू है सूरज तुझे मालूम कहाँ रात का दुख
तू किसी रोज़ मेरे घर में उतर शाम के बा'द
Farhat Abbas Shah
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इसी से जान गया मैं कि बख़्त ढलने लगे
मैं थक के छाँव में बैठा तो पेड़ चलने लगे

मैं दे रहा था सहारे तो इक हुजूम में था
जो गिर पड़ा तो सभी रास्ता बदलने लगे
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Farhat Abbas Shah
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मैं बे-ख़याल कभी धूप में निकल आऊँ
तो कुछ सहाब मिरे साथ साथ चलते हैं
Farhat Abbas Shah
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उसे ज़ियादा ज़रूरत थी घर बसाने की
वो आ के मेरे दर-ओ-बाम ले गया मुझ से
Farhat Abbas Shah
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कभी सहर तो कभी शाम ले गया मुझ से
तुम्हारा दर्द कई काम ले गया मुझ से
Farhat Abbas Shah
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उस के बारे में बहुत सोचता हूँ
मुझ से बिछड़ा तो किधर जाएगा
Farhat Abbas Shah
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