Kaifi Azmi

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Kaifi Azmi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Kaifi Azmi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
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  • Nazm
अपना पता मिले न ख़बर यार की मिले
दुश्मन को भी न ऐसी सज़ा प्यार की मिले

उन को ख़ुदा मिले, है ख़ुदा की जिन्हें तलाश
मुझ को बस इक झलक मेरे दिलदार की मिले
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एक ज़ख़्म ऐसा न खाया कि बहार आ जाती
दार तक ले के गया शौक़-ए-शहादत मुझ को
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रोज़ बस्ते हैं कई शहर नए
रोज़ धरती में समा जाते हैं
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रोज़ बढ़ता हूँ जहाँ से आगे
फिर वहीं लौट के आ जाता हूँ
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कोई कहता था समुंदर हूँ मैं
और मिरी जेब में क़तरा भी नहीं
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बहार आए तो मेरा सलाम कह देना
मुझे तो आज तलब कर लिया है सहरा ने
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जो इक ख़ुदा नहीं मिलता तो इतना मातम क्यूँँ
यहाँ तो कोई मिरा हम-ज़बाँ नहीं मिलता
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ग़ुर्बत की ठंडी छाँव में याद आई उस की धूप
क़द्र-ए-वतन हुई हमें तर्क-ए-वतन के बा'द
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इतना तो ज़िंदगी में किसी के ख़लल पड़े
हँसने से हो सुकून न रोने से कल पड़े
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बेलचे लाओ खोलो ज़मीं की तहें
मैं कहाँ दफ़्न हूँ कुछ पता तो चले
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गर डूबना ही अपना मुक़द्दर है तो सुनो
डूबेंगे हम ज़रूर मगर नाख़ुदा के साथ
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अब जिस तरफ़ से चाहे गुज़र जाए कारवाँ
वीरानियाँ तो सब मिरे दिल में उतर गईं
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जिस तरह हँस रहा हूँ मैं पी पी के गर्म अश्क
यूँँ दूसरा हँसे तो कलेजा निकल पड़े
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पेड़ के काटने वालों को ये मालूम तो था
जिस्म जल जाएँगे जब सर पे न साया होगा
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कोई तो सूद चुकाए कोई तो ज़िम्मा ले
उस इंक़िलाब का जो आज तक उधार सा है
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मेरा बचपन भी साथ ले आया
गाँव से जब भी आ गया कोई
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मुद्दत के बा'द उस ने जो की लुत्फ़ की निगाह
जी ख़ुश तो हो गया मगर आँसू निकल पड़े
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रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई
तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई
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बस्ती में अपनी हिन्दू मुसलमाँ जो बस गए
इंसाँ की शक्ल देखने को हम तरस गए
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इंसाँ की ख़्वाहिशों की कोई इंतिहा नहीं
दो गज़ ज़मीं भी चाहिए दो गज़ कफ़न के बा'द
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