Piyush Nishchal

Piyush Nishchal

@piyush_nishchal

Piyush Nishchal shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Piyush Nishchal's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
साहिब-ए-मसनद ज़रा आवाम की भी फ़िक्र कर लो
जान ले लेगी किसी दिन ये तुम्हारी हाकिमिय्यत
Piyush Nishchal
जानता हूँ कि बर्बाद हूँ मैं सो अब
तू मिरा ग़म मना ले नसीहत न दे
Piyush Nishchal
बचपन जवानी फिर मुहब्बत से गुज़र कर इस घड़ी
ऐ क़ब्र आँखें खोल आए हैं तिरे दहलीज़ पे
Piyush Nishchal
कभी शराब तो कभी ये गुल-बदन तुम्हारा जाँ
न  होश  में  कभी  न  नींद से  जगाया है मुझे
Piyush Nishchal
नदी दरख़्त चाँद ये सितारे सब जहाँ में हैं
मगर मुझे तुम्हारा चेहरा देखना सुकूँ दिया
Piyush Nishchal
मुहब्बत हम भी कर तो लें मगर डर है
कलेजा ही न कोई काट ले मेरा
Piyush Nishchal
वो जब आती है तो धोखे की बू आती है
उस को शायद कोई जी भर के चूमा होगा
Piyush Nishchal
जो कभी काम आए न इमदाद को
मुफ़्लिसी की उन्हें बस दुआएँ लगें
Piyush Nishchal
मुझ को अंदर से खाता है हिज्र किसी का
वर्ना शब को अच्छा-ख़ासा सोता था मैं 
Piyush Nishchal
फूल से जब-जब भी बातें होती है
मेरा चेहरा तब शगुफ़्ता होता है
इश्क़ के मैदान में सब मिलते हैं
और सबके साथ धोखा होता है
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Piyush Nishchal
आजकल पढ़ने लगा हूँ जौन को मैं
या'नी दुनिया से मुझे मतलब नहीं अब
Piyush Nishchal
लोग वो ख़ूब-सूरत हुए
जिन के भी होंठ पे तिल हुए
Piyush Nishchal
सिखाया  था  जिसे  मैं ने  मुहब्बत  में  वफ़ा  करना
वो लड़की इश्क़ में अब ख़ुद को फ़रज़ाना समझती है
Piyush Nishchal
तुम्हारे होंठ पर इक तिल को देखा तो लगा मुझ को
कि इस को पढ़के तेरे इश्क़ में नायाब हो जाऊँ
Piyush Nishchal
तेरी चाहत में बर्बादी का कारण बस इतना-सा है
मुझ को ये तेरे गजरा औ' काजल ने बर्बाद किया है
Piyush Nishchal
शराबी हूँ मगर ख़याल रहता है मुझे कि हाँ
शराब के नशे में भी तुम्हें हसीन कहना है
Piyush Nishchal
यक़ीं मानो कि वो अब भी मुहब्बत करती है मुझ सेे
यक़ीं  ये  भी  करो  यारा  कि मैं अब झूठ कहता हूँ
Piyush Nishchal
हम हिज्र में भी ख़ुश हैं पर दीवार-ओ-दर में रहते हैं
हम शहरयार-ए-ग़म ख़ुदा की हर नज़र में रहते हैं

हम लोग अब इक-दूसरे से मुख़्तलिफ़ होकर हैं ख़ुश
वो अपने घर में रहती है हम अपने घर में रहते हैं
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Piyush Nishchal
तेरी आँखों का सताया हूँ बिखर जाने दे
मैं कभी लौट न पाऊँगा कि मर जाने दे

तेरी चौखट से मिरे ख़ून की बू आएगी
क्या कहूँ अब कि यही सच है मगर जाने दे
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Piyush Nishchal
यकायक मरना है तो ख़ुद-कुशी कर लो
अगर क़िस्तों में तो फिर दिल-लगी कर लो

नहीं मरना है ज़िंदा भी नहीं रहना
मिरी मानो तो तुम फिर मयकशी कर लो
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Piyush Nishchal

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